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इस Football team में आपको मिलेगा पूरा टैलेंटेड भारत, जानिए कैसे


तीन दिवसीय स्टेट टैलेंट सर्च गेम्स का समापन हो गया है इस मैच में कई टीमों ने हिस्सा लिए लेकिन इस दौरान एक टीम ऐसी भी थी जिसमें लगभग पूरा देश शामिल था, नहीं समझे तो चलिए समझाते हैं आपको जी हां कोटा संभाग में एक टीम ऐसी भी थी जिसमें लगभग पूरा ‘देश’ खेल रहा था। यह लड़कियों की फुटबॉल टीम थी। इसमें मणिपुर, बिहार, असम, त्रिपुरा, मेघालय, ओडिशा, प. बंगाल, मिजोरम और दिल्ली के साथ-साथ राजस्थान की खिलाड़ी भी शामिल थी।इस टीम में ज्यादातर खिलाड़ी कोटा के एमानुएल स्कूल से थे, यह ऐसा स्कूल है जिसमें पूरे देश के गरीब और होनहार बच्चों को एडमिशन दिया जाता है। इन बच्चों का पूरा खर्च स्कूल ही उठाता है। रहने-खाने, खेलने, पढ़ाई आदि सभी का खर्च स्कूल मैनेजमेंट करती है। इस टीम में एक खिलाड़ी ऐसी है जो कि जूनियर में राजस्थान टीम की कप्तानी भी कर चुकी हैं। इसका नाम है सोना, सोना मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले की है और मिडफील्ड में खेलती हैं। माता-पिता मजदूरी का काम करते हैं। पहले झाबुआ में ही थे अब कोटा में रेलवे ट्रैक पर सफाई का काम करते हैं। इसी जिले की एक और खिलाड़ी हैं कमला। ये टीम में डिफेंडर की हैसियत से खेलती हैं। इनके माता-पिता खेतों में काम करते है सोना और कमला दोनों ही 2017 में इंफाल, मणिपुर में आयोजित हुई जूनियर नेशनल फुटबॉल चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाली राजस्थान टीम की सदस्य थीं। सोना इस टीम की कप्तान थीं। कहती हैं, हमारे माता-पिता के पास इतने संसाधन भी नहीं थे कि वे हमें ठीक से दो जून की रोटी भी दे सकते। इसीलिए हमें इस स्कूल में भेज दिया गया। हम 10 साल से इस स्कूल में हैं। कई-कई महीने माता-पिता से नहीं मिल पाते। ये स्कूल ही हमारे लिए सबकुछ है और यहां की टीचर वगैरह ही हमारे माता-पिता हैं। यहीं हमने फुटबॉल खेलना सीखा। पिछले साल पहली बार दिल्ली से मणिपुर तक फ्लाइट से सफर किया। कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि फ्लाइट से सफर करने को मिलेगा। एसजीएफआई नेशनल भी खेल चुकी हैं।

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