असम में हिंदी भाषी लोगों को सरकार ने दिया तोहफा

मातृभाषा हिंदी को राज्य में जन जन तक पहुंचाने के लिए अब सरकार कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाह रही है और यही कारण है कि अब सरकार मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी की तर्ज पर असम सरकार भी अपने राज्य में हिंदी ग्रंथ अकादमी स्थापित करेगी। असम में अकादमी की स्थापना के बाद राज्य का इतिहास, साहित्य मप्र सहित अन्य हिंदी भाषी राज्यों के लोगों को हिंदी में पढ़ने के लिए उपलब्ध होगा। असम सरकार ने मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी के संचालक डॉ. एसबी गोस्वामी के इस सुझाव पर अपने राज्य में अकादमी की स्थापना का निर्णय लिया है। डॉ. गोस्वामी ने यह सुझाव शुक्रवार को गुवाहाटी में चल रहे असम लिटरेरी फेस्टीवल में असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल को दिया, जिसे उन्हाेंने स्वीकार कर लिया। डॉ. गोस्वामी ने भास्कर से चर्चा में बताया कि असम में हिंदी ग्रंथ अकादमी अगर स्थापित होती है तो यह पूर्वांचल में पहली होगी। अभी गैर हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी ग्रंथ अकादमी केवल गुजरात और उड़ीसा में ही है। उनका कहना है कि अकादमी की स्थापना में यदि असम सरकार को मदद की जरूरत पड़ती है तो उन्हें सहयोग किया जाएगा।
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