असम की ही थी महिला, विदेशी बताकर राष्ट्रीय स्मारक में जाने से रोक दिया

एक तरफ जहां प्रधानमंत्री देश के सभी हिस्सों को एक दूसरे से जोड़ने और पूर्वोत्तर राज्यों को देश की मुख्य धारा में जोड़ने के लिए प्रयास कर रहे हैं ऐसे में अभी भी पूर्वोत्तर के रहने वाले लोगों के साथ देश के अन्य इलाकों में भेदभाव का व्यवहार किया जाता है। उनके कई बार देश के नागरिक होने पर भी सवाल उठाये जाते हैं. ऐसा ही एक ताजा मामला सामने आया है आगरा से जहां असम की रहने वाली एक महिला को विदेशी बताकर एतमाद उद दौला के मकबरे में जाने से रोक दिया। इसे बेबी ताज भी कहा जाता है।पिछले 15 साल से दिल्ली में रहने वाली मंजीत चानू का जन्म असम में हुआ था और वह नागालैंड में पली-बढ़ी हैं। वह अपने दोस्त और उसके छोटे भाई के साथ आगरा घूमने गईं, तो उन्होंने सोचा भी नहीं था कि उन्हें अपने ही देश में ही विदेशी घोषित कर दिया जाएगा। मंजीता चानू पिछले हफ्ते अपने दोस्तों के साथ आगरा के एतमाद उद दौला मकबरे में घुमने गई, तो वहां तैनात सुरक्षा गार्ड ने उसे वहां एंट्री नहीं दी।सिक्योरिटी गार्ड ने कहा कि वह एक विदेशी महिला है और उसे इस टिकट के आधार पर मकबरे में एंट्री नहीं दी जा सकती है। वहां जाने के लिए उसे और पैसे देने होंगे। इस पर मंजीता ने कहा कि वह भारतीय हैं, तो गार्ड ने आईडी कार्ड मांगा।वह अच्छी हिंदी बोल रही थीं, इसके बावजूद गार्ड काफी देर तक उसे विदेशी कहता रहा। मंजीता के आईडी कार्ड दिखाने के बाद भी करीब 25 मिनट की बहस की। इसके बाद मंजीता ने जब कई लोगों से बात की, तो आखिरकार उसे अंदर घुसने दिया।मंजीत ने पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर फेसबुक पर डाल दिया। इस घटना पर लोगों ने काफी हैरानी जताई है। मंजीता चानू ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि उसने कई बार पूर्वोत्तर के लोगों के साथ रंगभेद की घटनाएं सुनी थी, लेकिन दिल्ली में उन्हें ऐसा कभी व्यक्तिगत रुप से महसूस नहीं किया था।मंजीता ने कहा कि मकबरे में तैनात गार्ड ने चेकिंग के नाम पर उसका पर्स दिखाने को कहा। जब मंजीता ने कहा कि वो सिर्फ लेडीज गार्ड को ही अपना पर्स दिखाएगी, तो गार्ड ने कहा कि वो लंच कर रही है और उसे इंतजार करना पड़ेगा। मंजीत के मुताबिक वो खुद गार्ड के कमरे में गई, लेकिन वहां कोई नहीं था। मंजीत ने कहा कि आगरा में उनका अनुभव बेहद डरावना रहा।
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