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देशद्रोह का केस दर्ज होने से भड़का उल्फा नेता, असम सरकार को दी धमकी


डेरगांव पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए वार्ता समर्थन उल्फा नेता जितने दत्ता के खिलाफ नस्लीय भेदभाव और राजद्रोह का केस दर्ज किया था। केस दर्ज होने के बाद भड़के दत्ता ने असम सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि असमिया लोगों की पहचान को बचाने के लिए उसकी लड़ाई जारी रहेगी। समाचार पत्र द टेलीग्राफ से बातचीत में दत्ता ने कहा, मैं हमारी पहचान और अस्तित्व के लिए लड़ रहा हूं, जो खतरे में है। अगर सरकार असमिया लोगों की पहचान बचाने की लड़ाई के दौरान मेरे खिलाफ केस दर्ज करती है तो मुझे इसकी रत्ती भर परवाह नहीं है। दत्ता उस वक्त उल्फा की 28 बटालियन का कमांडर था जब उन्होंने 2008 में एकतरफा संघर्ष विराम की घोषणा की थी। दत्ता ने आरोप लगाया कि असम में भाजपा के नेतृत्व की सरकार बांग्लादेशियों व उनके समर्थकों के प्रति सॉफ्ट है और वह उन लोगों को प्रताडि़त कर रही है जो इंडिजनस लोगों की पहचान के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। बकौल दत्ता, भाजपा सरकार को सत्ता में आए एक साल से ज्यादा हो चुका है। बांग्लादेशियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने का काम रूक गया है? चुनाव से पूर्व भाजपा ने जो वादे किए थे उनमें यह प्रमुख वादा था। इस वादे के चलते ही उन्हें वोट किया गया था। पुलिस के समक्ष पेश नहीं होने पर दत्ता ने कहा, मुझे कम वक्त में समन मिले हैं लेकिन मेरा शेड्यूल टाइट है। डेरगांव पुलिस थाने के प्रभारी को मैंने आवेदन के जरिए बता दिया था कि मैं तय तारीख पर पेश नहीं हो पाऊंगा। अगर मुझे आगे कोई नोटिस मिलता है तो मैं खुद को पेश करूंगा। मेरी लड़ाई जारी रहेगी। गोलाघाट की डेरगांव पुलिस ने आईपीसी की धारा 153 ए व 121 के तहत केस दर्ज किया था। 121 के तहत दत्ता को दोषी करार दिया जाता है तो उसे उम्र कैद या फांसी की सजा हो सकती है। पुलिस ने बताया कि हमने स्वत: संज्ञान लेकर दत्ता के खिलाफ कथित रूप से नारे लगाने, उल्फा व वार्ता विरोधी उल्फा गुट के कमांडर इन चीफ परेशन परेश बरुआ को पैट्रनाइजिंग करने को लेकर केस दर्ज किया है। नगांव में वार्ता समर्थक उल्फा के सदस्यों पर कुछ व्यापारियों की ओर से किए गए कथित हमले के विरोध में 29 अगस्त को डेरगांव में रैली के दौरान दत्ता ने नारेबाजी की थी। शनिवार को सीआरपीसी की धारा 41 ए के तहत दत्ता को नोटिस जारी किया गया। उसे पुलिस के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया। नगांव में वार्ता समर्थक उल्फा का सदस्य मून बोरा कथित रूप से जबरन पैसे वसूल रहा था। वह बाढ़ पीडि़तों की मदद के नाम पर पैसे वसूल रहे था। कुछ व्यापारियों ने उसकी कथित रूप से पिटाई कर दी। इस घटना से नगांव में तनाव उत्पन्न हो गया था।

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