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एक शख्स ने अपनी शादी कार्ड के ऊपर ऐसी बात लिखी, जिसे पढ़ने के बाद मेहमान हैरान रह गए


जब किसी के घर में शादी होती है तो वह अपने परिवारों के नाम व जगह के बारे में जानकारी देता है, लेकिन एक शख्स ने अपने कार्ड के ऊपर ऐसी चीज लिखी, जिसे पढ़ने के बाद मेहमान हैरान रह गए.राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ किसान विरोध प्रदर्शन खत्म होने के एक महीने से अधिक समय के बाद, हरियाणा के एक व्यक्ति ने अपनी शादी से दो सप्ताह पहले 1500 विवाह कार्ड प्रिंट करवाया. जिसमें उसने केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध का एक अनूठा तरीका चुना. उसने फसल उपज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी देने वाले कानून की मांग की.यह भी पढ़े : Shani Rashi Parivartan : इस दिन से बदल जाएगी इन 3 राशि वालों की किस्मत, मिट जाएंगे सारे दुख -दर्द9 फरवरी को शादी के लिए छपवाए 1500 कार्डहरियाणा के भिवानी जिले के रहने वाले प्रदीप कालीरामना 9 फरवरी को शादी कर रहे हैं. उन्होंने 1,500 शादी के कार्ड छपवाए हैं. अपनी शादी के कार्ड के ऊपर जंग अभी जारी है, एमएसपी की बारी है लिखा. इसके अलावा, शादी के कार्ड पर एक ट्रैक्टर और नो फार्मर्स, नो फूड को दर्शाने वाला एक साइनबोर्ड भी प्रदर्शित किया गया है. शादी के कार्ड के जरिए दिया ऐसा मैसेजप्रदीप ने कहा, मैं अपनी शादी के कार्ड के माध्यम से यह संदेश देना चाहता हूं कि किसानों के विरोध की जीत अभी पूरी नहीं हुई है. किसानों की जीत तभी घोषित की जाएगी जब केंद्र सरकार गारंटी देने वाले एमएसपी अधिनियम के तहत एक कानून किसानों को लिखित में देगी.यह भी पढ़े : Chaitra Navratri 2022: चैत्र नवरात्रि से हिंदू पंचांग का नया साल संवत 2079 शुरू होगा , इन राशि वालों को होगा लाभ-नुकसानएमएसपी पर कानून के बिना, किसानों के पास कुछ भी नहीं है और किसानों की शहादत और उनके बलिदान भी तभी पूरे होंगे जब एमएसपी पर कानूनी गारंटी होगी.उन्होंने कहा, किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान, मैं दिल्ली की सीमाओं पर गया और विभिन्न विरोध स्थलों पर बैठे अन्य सभी किसानों को भी अपना समर्थन दिया. यही कारण है कि मैंने एमएसपी पर कानूनी गारंटी की मांग करते हुए 1500 शादी के कार्ड छपवाए.किसान का आंदोलन 13 महीने तक दिल्ली की सीमाओं पर चलादरअसल कृषि कानून 5 जून, 2020 को केंद्र सरकार ने तीन कृषि विधेयकों को संसद के पटल पर रखा और 20 सितंबर को लोकसभा के बाद इसे राज्यसभा में पारित किया गया था.वहीं कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन 13 महीने तक दिल्ली की सीमाओं पर चला, आखिर में सरकार ने कृषि कानून वापस ले लिया था, इसके बाद किसानों की अन्य मांगों पर किसानों और सरकार के साथ समझौता भी हुआ.

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