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Pitru Paksha Shradh 2021: 100 साल बाद सर्वपितृ अमावस्या पर बन रहा अद्भुत संयोग, जानिए 5 अक्टूबर की खासियत


सर्वपितृ अमावस्या (Pitru Paksha Shradh) सर्वार्थसिद्धि योग, गजछाया योग, ब्रह्मयोग सहित अन्य योग संयोगों में छह अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन पितृपक्ष यानी श्राद्ध (Pitru Paksha Shradh) समाप्त होंगे। वहीं इसके अगले दिन से शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri) की शुरुआत भी होगी। पितृ पक्ष में सर्वपितृ अमावस्या (sarvapitri amavasya) का विशेष महत्व माना गया है। इसी कारण इसे मोक्षदायिनी अमावस्या भी कहा जाता है। अमावस्या तिथि पांच अक्टूबर को शाम 7.05 बजे से अगले दिन शाम 4.35 बजे तक रहेगी। इस बार 100 साल बाद सर्वार्थसिद्धि व 11 साल बाद गजछाया में अमावस्या रहेगी। इस दिन श्राद्ध (Pitru Paksha Shradh) निकालने से पितरों का आशीर्वाद मिलने के साथ ही प्रगति सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। सूर्य, मंगल, बुध और चंद्रमा के कन्या राशि में विराजमान होने से चतुग्र्रही योग भी बनेगा। इस दिन दान-पुण्य करने का विशेष महत्व रहेगा।सर्वपितृ अमावस्या (sarvapitri amavasya) के दिन सभी पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाना शास्त्र सम्मत माना गया है। इस दिन ज्ञात, अज्ञात सभी पितरों के श्राद्ध का विधान है, यानी जिन लोगों को परिजनों की मृत्यु की तिथि याद ना हो, वो भी इस दिन पितरों का श्राद्ध और तर्पण कर पित्तरों का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। इस मौके पर पितरों के निमित्त तर्पण व पौधरोपण किया जाएगा।इस बार पितृ पक्ष की अमावस्या (pitru paksh ki amavasya) के दिन 11 साल बाद गजछाया योग निर्मित हो रहा है। इस खास दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों ही हस्त नक्षत्र में सूर्योदय से शाम 4.34 तक रहेंगे। अमावस्या की तिथि में सूर्य और चंद्रमा दोनों के हस्त नक्षत्र में होने से यह योग बनता है। इसके बाद यह शुभ योग 8 साल बाद यानी 2029 में बनेगा। पौराणिक मान्यता है कि इस योग में श्राद्ध (Pitru Paksha Shradh) करने से पितर प्रसन्नत होने से घर में सुख समृद्धि आती है और कर्ज से मुक्ति मिलती है। इस योग में श्राद्ध और दान करने से अगले 12 वर्षों तक पितर तृप्त रहते हैं। इस दिन जरूरतमंद को खरी, अन्न और वस्त्र दान करना चाहिए और ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए।

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