भाविना पटेल: 12 महीने की उम्र में हुआ पोलियो, पिता के पास नहीं थे इलाज के पैसे, अब रच दिया इतिहास

जापान के टोक्यो में चल रहे पैरालंपिक गेम्स में भारत की भाविना पटेल गोल्डन गर्ल बनने से महज एक कदम दूर हैं। भाविना पटेल ने फाइनल में जगह पक्की कर ली है। सेमीफाइनल में भाविना पटेल ने वर्ल्ड रैंकिंग में नंबर तीन खिलाड़ी मियो को 3-2 से हराया। फाइनल में पहुंचने के साथ ही भाविना पटेल ने भारत के लिए टोक्यो पैरालंपिक गेम्स में पहला मेडल पक्का कर दिया है।6 नवंबर 1986 में गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर के एक छोटे से गांव में जन्मीं भाविना सिर्फ 12 माह की थीं तब वे पोलियो ग्रसित हो गईं। पांच लोगों के परिवार में इकलौते कमाने वाले पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि इलाज करवा पाए। बाद में विशाखापट्टनम में सर्जरी जरूर हुई, लेकिन नतीजा नहीं निकला। भाविना की मौजूदा वर्ल्ड रैंकिंग 12 है। गौरतलब है कि एक समय था जब भाविना की वर्ल्ड रैंकिंग 2 भी रह चुकी है।भाविना ने कहा, यह पहली बार है कि किसी भारतीय खिलाड़ी ने एक चीनी प्रतिद्वंद्वी को हराया है। यह मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। हर कोई मुझसे कहता था कि एक चीनी खिलाड़ी को हराना असंभव है। लेकिन आज मैंने साबित कर दिया है कि दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। अगर आप इसे करना चाहते हैं तो सब कुछ संभव है। उन्होंने देश के लोगों, भारतीय पैरालंपिक समिति (पीसीआई), भारतीय खेल प्राधिकरण (साई), अपने प्रायोजकों ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट (ओजीक्यू), ब्लाइंड पीपुल्स एसोसिएशन, अहमदाबाद (जहां उन्होंने टेबल टेनिस सीखा) और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) को सहायता के लिए धन्यवाद दिया।उन्होंने कहा, उनके समर्थन के कारण ही मैं आज इस मुकाम पर पहुंच पाई हूं। सभी का धन्यवाद। उन्होंने कहा, मैंने कभी खुद को दिव्यांग नहीं माना। आज मैंने साबित कर दिया है कि कुछ भी असंभव नहीं है। गुजरात के अहमदाबाद में ईएसआईसी के लिए कार्यरत सरकारी कर्मचारी भाविना शनिवार को पैरालंपिक खेलों के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी बनीं। उन्होंने कहा, अगर मैं खेल के समान मानक को बनाए रखती हूं, तो मैं स्वर्ण पदक जीत सकती हूं, जब मैंने अपने पहले पैरालिंपिक में अपनी यात्रा शुरू की थी, तो मैंने इस स्तर तक पहुंचने की उम्मीद नहीं थी। भाविना ने ट्विटर पर भारत की पैरालंपिक समिति द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा, जब मैंने शुरूआत की थी तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस मुकाम पर पहुंचूंगी। मैं यहां हर खेल में अपना शत-प्रतिशत देने के उद्देश्य से आई हूं और मैंने अब तक यही किया है। अगर आप अपना 100 प्रतिशत किसी चीज को देते हैं, तब पदक आएंगे। फाइनल के बारे में पूछे जाने पर भाविना ने कहा कि वह चीन की झोउ यिंग से भिड़ने के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं, जिनसे वह टोक्यो में अपने शुरूआती मैच में हार गई थीं।भाविना ने कहा, मैं उस मैच के लिए मानसिक रूप से तैयार हूं। मैं उस मैच में भी अपना 100 प्रतिशत दूंगी।
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