Chenab Bridge: पाकिस्तान से महज 65 किलोमीटर दूर भारतीय रेलवे ने किया बड़ा कारनामा, रच दिया इतिहास

भारतीय रेलवे ने जम्मू कश्मीर में रियासी जिले में चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल के निर्माण के एक बेहद अहम चरण को पार करते हुए इस्पात की अद्र्धवृत्ताकार मेहराब का निर्माण पूरा कर लिया। जब एक केबल क्रेन के माध्यम से विशाल मेहराब के बीचोंबीच का 5.6 मीटर लंबा हिस्सा जोड़ा गया तो वहां मौजूद रेलकर्मी, इंजीनियर एवं अन्य सभी लोग खुशी से झूम उठे और वंदे मातरम के हर्ष उद्घोष के साथ एक-दूसरे से हाथ मिलाया और अपनी इस उपलब्धि का यशगान किया।मेहराब के 359 मीटर नीचे बह रही चिनाब नदी के ठीक ऊपर यह काम काफी जोखिम भरा था। चिनाब के ऊपर पुल बनाने का यह सबसे कठिन हिस्सा था। यह उपलब्धि कटरा से बनिहाल तक 111 किलोमीटर लंबे खंड को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पुल का निर्माण निश्चित रूप से हाल के इतिहास में भारत में किसी रेल परियोजना के सामने आने वाली सबसे बड़ी सिविल-इंजीनियरिंग चुनौती है। यह दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पुल है जो चीन में बीपन नदी पर बने ड्यूग पुल की ऊंचाई से अधिक है। पुल के उत्तरी छोर पर केबल क्रेन के पाइलन की ऊंचाई 127 मीटर है जो कुतुब मीनार की ऊंचाई से 72 मीटर से भी अधिक है। जबकि फ्रांस की राजधानी पेरिस के प्रतिष्ठित एफिल टावर से 35 मीटर ऊंचा है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा सभी भारतीयों के लिए यह बहुत गौरव के क्षण हैं और यह पुल हर भारतीय का दिल खुश कर देगा। देश के जन-जन का सामथ्र्य और विश्वास आज दुनिया के सामने एक मिसाल पेश कर रहा है। यह निर्माण कार्य न केवल अत्याधुनिक इंजीनियङ्क्षरग और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत को प्रदर्शित करता है, बल्कि संकल्प से सिद्धि की देश की बदली हुई कार्य संस्कृति का भी उदाहरण है। रेल मंत्री पीयूष गोयल, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुनीत शर्मा, उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल ने वीडियो कॉन्फ्रेंङ्क्षसग के माध्यम से इस ऐतिहासिक काम को पूरा होते हुए देखा।एक दशक से अधिक समय से निर्माणाधीन इस पुल के काम में इस चरण के पूरा होने के बाद आगे का काम आसान हो गया है और मेहराब का काम पूरा होने के बाद, स्टे केबल्स को हटाने, मेहराब रिब में कंक्रीट भरने, स्टील ट्रेस्टल को खड़ा करने, वायडक्ट लॉन्च करने और ट्रैक बिछाने का काम शुरू किया जाएगा। वहां मौजूद अधिकारियों ने को बताया कि यह पुल लंबे समय से चले आ रहे बारामूला-ऊधमपुर रेल मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे कन्याकुमारी से कश्मीर तक ट्रेन पहुंचने में सक्षम हो सकेगी।पुल जोन-5 की उच्च तीव्रता के साथ भूंकप के झटके को सहन कर सकता है। पुल को इस प्रकार से डिजाइन किया गया है कि उसकी आयु कम से कम 120 वर्ष हो। इस पर पटरियां इस हिसाब से बिछाई जाएंगी कि गाड़ी अधिकतम 100 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चल सके हालांकि गाड़ी 30 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चलेगी। पुल के बचाव के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं क्योंकि पुल से पाकिस्तान की हवाई दूरी सिर्फ 65 किलोमीटर है।
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