मंगल पर जारी जीवन की खोज के बीच मिली मकड़ीनुमा आकृति, वैज्ञानिक भी हुए हैरान

मंगल पर जीवन की खोज जारी है। इसी को लेकर आए दिन कोई न कोई नया खुलासा हो रहा है। इन्हीं चकित करने वाले रहस्यों की कड़ी में मकड़ीनुमा आकृति लाल ग्रह पर मिलने के बाद वैज्ञानिक इस गुत्थी को सुलझाने में जुट गए हैं। जानकारी के अनुसार मंगल ग्रह पर पाई गईं इन मकड़ी की तरह की आकृतियों को वैज्ञानिकों ने ऐरेनीफॉम्र्स नाम दिया है जो ग्रह की सतह पर ऊंचाई-गहराई से बनती हैं। खास बात यह है कि ऐसी आकृति पृथ्वी पर कहीं भी नहीं पाई गई है। मंगल ग्रह पर ये आकृतियां कैसे उभरीं अभी अनसुलझा सवाल है। हालांकि वैज्ञानिकों ने संभावना जताई है कि कार्बन डाय ऑक्साइड की बर्फ के बिना पिघले भाप में तब्दील होने के कारण ऐसी आकृतियां बनती हैं।जानकारी के मुताबिक ब्रिटेन, आयरलैंड के वैज्ञानिकों ने ओपन यूनिवर्सिटी मास सिम्यूलेशन चैंबर की मदद से मंगल जैसे हालात पृथ्वी पर पैदा किए और फिर देखा कि क्या इस प्रक्रिया से ऐसी आकृति बन सकती है। इसके लिए कार्बन डाय ऑक्साइड की बर्फ के टुकड़ों में छेद किए गए और फिर अलग-अलग आकार के दानों पर उन्हें घुमाया गया। इसके बाद चैंबर में दबाव को मंगल की तरह कम किया गया और ब्लॉक्स को सतह पर रखा गया। इसके बाद कार्बन डाय ऑक्साइड के टुकड़े सब्लिमेट हो गए और जब इन्हें हटाया गया तो पाया गया कि वैसी ही मकड़ी जैसी आकृति गैस के कारण बन गई थी।वैज्ञानिकों के अनुसार इससे मंगल पर दिखने वाली आकृति को समझा जा सकता है। इस हाइपोथीसिस को काइफर्स हाइपोथीसिस कहा गया है। बसंत के मौसम में सूरज की रोशनी बर्फ से होकर नीचे की सतह को गर्म करती है, जिससे बर्फ सब्लिमेट होती है। इससे नीचे दबाव बनता है जो दरारों के रास्ते निकलता है। गैस के निकलने के साथ पीछे मकड़ी सी आकृति रह जाती है। अभी तक इस थ्योरी को माना जाता रहा है लेकिन इसका सबूत नहीं पाया गया था।
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