बड़ी खबर : देश में कोरोना वैक्सीनेशन 16 जनवरी से शुरू, 3 करोड़ लोगों को सबसे पहले दी जाएगी डोज

देश में कोरोना वैक्सीनेशन 16 जनवरी से शुरू होगा। सरकार का कहना है कि सबसे पहले 3 करोड़ हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन दी जाएगी। दूसरे फेज में 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों और तीसरे फेज में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 50 साल से कम उम्र के लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी। दूसरे और तीसरे फेज में करीब 27 करोड़ लोगों का वैक्सीनेशन होगा। वैक्सीनेशन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश में कोरोना की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में कैबिनेट सेक्रेटरी, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, हेल्थ सेक्रेटरी और दूसरी सीनियर अफसर भी शामिल हुए। भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियाकी कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सिन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी मिल चुकी है। दोनों वैक्सीनों को 3 जनवरी को हरी झंडी दिखाई गई थी। इनके अलावा भी देश में कई वैक्सीनों का ट्रायल चल रहा है। इसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि जल्द ही देश में वैक्सीनेशन की शुरुआत हो सकती है। जानिए कोवैक्सिन की खासियत ?- कोवैक्सिन के फेज-2 क्लिनिकल ट्रायल्स के नतीजे 23 दिसंबर को सामने आए थे। ट्रायल्स 380 सेहतमंद बच्चों और वयस्कों पर किए गए। - 3 माइक्रोग्राम और 6 माइक्रोग्राम के दो फॉर्मूले तय किए गए. दो ग्रुप्स बनाए गए। उन्हें दो डोज चार हफ्तों के अंतर से लगाए गए। - फेज-2 ट्रायल्स में कोवैक्सिन ने हाई लेवल एंटीबॉडी प्रोड्यूस की. दूसरे वैक्सीनेशन के 3 महीने बाद भी सभी वॉलंटियर्स में एंटीबॉडी की संख्या बढ़ी हुई दिखी। - ट्रायल के नतीजों के आधार पर कंपनी का दावा है कि कोवैक्सिन की वजह से शरीर में बनी एंटीबॉडी 6 से 12 महीने तक कायम रहती है। - एंटीबॉडी यानी शरीर में मौजूद वह प्रोटीन, जो वायरस, बैक्टीरिया, फंगी और पैरासाइट्स के हमले को बेअसर कर देता है। - कंपनी का दावा है कि फेज-3 के लिए देशभर में सबसे ज्यादा 23 हजार वॉलंटियर्स पर ट्रायल हुआ। जानिए कोवीशील्ड की खासियत?कोवीशील्ड के क्लिनिकल ट्रायल्स के एनालिसिस से बहुत अच्छे नतीजे सामने आए हैं। वॉलेंटियर्स को पहले हाफ डोज दिया और फिर फुल डोज। किसी को भी हेल्थ से जुड़ी कोई गंभीर समस्या देखने को नहीं मिली है। जब हाफ डोज दिया गया तो इफिकेसी 90 फीसदी मिली। एक महीने बाद उसे फुल डोज दिया गया। जब दोनों फुल डोज दिए गए तो इफिकेसी 62 प्रतिशत रही। दोनों ही तरह के डोज में औसत इफिकेसी 70 प्रतिशत रही। सभी नतीजे आंकड़ों के लिहाज से खास हैं। इफिकेसी जानने के लिए वैक्सीन लगाने के एक साल बाद तक वॉलेंटियर्स के ब्लड सैम्पल और इम्युनोजेनिसिटी टेस्ट किए जाएंगे। इंफेक्शन की जांच के लिए हर हफ्ते सैम्पल लिए जा रहे हैं।
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