अर्नब मामले पर टिप्पणी पर बुरे फंसे भाजपा के मुख्यमंत्री, जानिए कैसे

रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर हमला बोलने वाले त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। पत्रकारों के संगठन ने गुरुवार को देब की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पत्रकार अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी को लेकर मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं, जबकि उन्होंने 11 सितंबर को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मीडिया को चेतावनी दी थी, जिसके बाद ही राज्य में करीब नौ पत्रकारों पर हमले हुए हैं। पत्रकारों पर हुए इन हमलों की न तो मुख्यमंत्री और न ही उनकी सरकार ने निंदा की है। देब ने अर्नब की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए ट्वीट किया, ‘‘अर्नब गोस्वामी के खिलाफ खुले तौर पर सत्ता का दुरुपयोग किया गया है जोकि वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किया गया एक हमला है। यह हमें कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के आपातकाल के दौरान किए गए अत्याचारों की याद दिलाता है।’’ दरअसल, देब ने मीडिया के एक धड़े पर आरोप लगाया था कि राज्य में कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों को कमतर करके दिखाया जा रहा है और लोगों को बहकाया जा रहा है। त्रिपुरा में पत्रकारों के शीर्ष संगठन असेंबली ऑफ जर्नलिस्ट (एओजे) देब के इस बयान का लगातार विरोध कर बयान वापस लेने की मांग कर रहे हैं लेकिन श्री देब की ओर से अब तक इस संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की गयी है। एओजे के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार सुबल कुमार डे ने मुख्यमंत्री की आलोचना करते हुए कहा, हम अर्नब की गिरफ्तारी का पुरजोर तरीके से विरोध करते हैं और उनकी तत्काल रिहाई की मांग भी करते हैं, लेकिन बिप्लब देब की टिप्पणी केवल भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं को दिखाने के लिए है और कुछ नहीं’
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