केदारनाथ धाम में टूट सकती है आदि शंकराचार्य की परंपरा! खड़ा हुआ ये विवाद

कोरोना वायरस संकट के चलते चार धाम में आदि शंकराचार्य की स्थापित परंपरा टूट सकती है। हालांकि 400 साल में केवल चार बार ऐसा हुआ है, जब रावल की गैरमौजूदगी में केदारनाथ धाम के कपाट खुले। वहीं बदरीनाथ धाम के रावल केरल में फंसे हुए हैं। उनके आने और परंपरा का पालन करने में क्वारंटीन भी एक अड़चन है। चार धाम के कपाट खुलने की तारीख करीब है।Tweets by dailynews360 इसी के साथ चार धाम के कपाट खुलने से पहले विवाद खड़ा हो गया है। तीर्थ पुरोहित चार धाम में ऑनलाइन पूजा का विरोध कर रहे हैं। इस बीच राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए अहम इस यात्रा का टलना तय है। आध्यात्मिक मामले में बढ़ते विवाद को थामने के लिए कैबिनेट की बैठक में त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने टिहरी राजपरिवार को मध्यस्थ बनाया है। बदरीनाथ धाम के कपाट खोलने की व्यवस्था या नई तारीख तय करने का अधिकार राजपरिवार को दिया गया है। रावत कैबिनेट ने तय कर दिया कि टिहरी राजपरिवार वर्तमान रावल से पूजा अर्चना कराने के लिए तारीख को बदल सकता है। पूजा का अधिकार स्थानीय ब्राह्मण को भी दिया जा सकता है। केदारनाथ धाम में भी रावल के प्रतिनिधि के जरिए पूजा कराने का विकल्प सरकार ने खुला रखा है। नवगठित देवस्थानम बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और कमिश्नर गढ़वाल बयान का चार धाम तीर्थ पुरोहितों ने विरोध किया था। उन्होंने चार धाम मंदिरों में ऑनलाइन पूजा की बात कही है। देवभूमि तीर्थ पुरोहित हकहकूक धारी महापंचायत ने इस बयान पर कहा कि सीईओ ने कहा है कि मंदिरों की पूजा ऑनलाइन की जा सकती है। इन विश्व प्रसिद्ध मंदिरों की पूजा अर्चना सदियों से आदि गुरु शंकराचार्य की परंपरा के अनुसार की जा रही है । महापंचायत के अनुसार ऑनलाइन पूजा संबंधी बयान आदि काल से चली आ रही परंपराओं के खिलाफ है। असल में यह विवाद चार धामों में से दो धाम बदरीनाथ और केदारनाथ के प्रमुख रावलों के लॉकडाउन में दूसरे राज्यों में फंसे होने से पैदा हुआ है। केदारनाथ के प्रमुख रावल भीमाशंकर लिंग महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में फंसे हैं। वहीं, बदरीनाथ के प्रमुख रावल ईश्वरी प्रसाद नम्बूदरी केरल के अपने गृह जिले में फंसे हैं। केदारनाथ के प्रमुख रावल भीमाशंकर लिंग को महाराष्ट्र सरकार सड़क मार्ग से केदारनाथ के लिए रवाना होने की अनुमति दे चुकी है। भीमाशंकर लिंग शुक्रवार को केदारनाथ के लिए नांदेड़ से रवाना होंगे। यह जानकारी उन्होंने तीर्थाटन मंत्री को दी है । उन्होंने लॉकडाउन में सड़क मार्ग से केदारनाथ जाने की इजाजत देने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। केरल में फंसे बदरीनाथ के प्रमुख रावल ईश्वरी प्रसाद नम्बूदरी को बदरीनाथ लाने के लिए अनुमति देने के लिए उत्तराखंड के मुख्य सचिव ने केरल के मुख्य सचिव और केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को पत्र भेजा है। ताकि उन्हें भी उत्तराखंड आने की मंजूरी मिल सके। अब चूंकि धामों के कपाट खुलने का समय बिलकुल करीब आ चुका है ऐसे में अगर ये दोनों प्रमुख रावल कपाटों के कहने से पूर्व भी इन धामों में आ गए तो भी इनको चौदह दिन के क्वारंटीन में रखना होगा। ऐसे में इनसे दोनों धामों के कपाटों के खोलने के दौरान की जाने वाली पूजाएं संपन्न नहीं कराई जा सकतीं। इसी कारण यह एक मसला पैदा हुआ है कि इन दोनों धामों केदारनाथ और बदरीनाथ के कपाट खुलने पर पूजा आखिर करेगा कौन? आदि शंकराचार्य की परंपरा के अनुसार इन दोनों धामों के रावलों की उपस्थिति इस दौरान जरूरी है । बढ़ते विवाद के बीच कैबिनेट मंत्री और सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि रावलों को लाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन इसमें पेच यह है कि दूसरे राज्य से आने पर सरकार को उन्हें 14 दिन के क्वारंटीन में रखना होगा। इससे आने का भी ज्यादा लाभ न मिलेगा। मंदिर समिति और शास्त्रों की व्यवस्था के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में कपाट खोले जाने और नियमित पूजा-अर्चना के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। ऐसे में बदरीनाथ धाम के लिए क्या व्यवस्था की जाए, इसके लिए टिहरी राजपरिवार से परामर्श लिया जा रहा है। उनकी ओर से जो व्यवस्था दी जाएगी, उसी के अनुरूप सरकार कदम उठाएगी।Follow @dailynews360
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