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अब भागेगा कोरोना! मोर्चे पर उतरी 2600 महिलाएं कर रही ये काम


अब जल्द ही कोरोना वायरस देश से खत्म हो सकता है। क्योंकि डॉक्टरों, पुलिसकर्मियों समेत अब कामकाजी महिलाएं भी मोर्चे पर उतर चुकी हैं। इसी के चलते असम में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए 2600 महिलाएं मोर्चे पर उतर चुकी हैं। देश में जारी लॉकडाउन के दौरान मास्क की कमी दूर करने के लिए असम में एनजीओ की 2600 से अधिक महिलाएं दिन रात मेहनत कर इनका निर्माण कर रही हैं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। असम प्रदेश शहरी आजीविका मिशन (ASULM) के दिशानिर्देश में, 261 एनजीओ से जुड़ी महिलाएं मास्क बना रही हैं। बताया गया है कि इन महिलाओं ने लगभग 77 हजार मास्क बनाए जो प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लोगों के बीच बांटे जा चुके हैं। गुवाहाटी के निरीबिली एसएचजी की अध्यक्ष दीप्ति कुमारी ने बताया कि समूह ने बिहू त्योहार के लिए बड़ी तादाद में गमोसास (असमी मफलर) बनाया था लेकिन कोरोना वायरस महामारी के कारण देश भर में जारी लॉकडाउन के कारण वह बिक नहीं सके। उन्होंने बताया, ASULM के साथ परामर्श के बाद हमने सूती गमोसास से मास्क का बनाना शुरू किया है। इस तरह हम अपने नुकसान की भरपाई करने का प्रयास कर रहे हैं। बाजार लगभग बंद है, इसलिए ASULM ने भी वितरण के लिए हमारे उत्पाद को लिया है। कुमारी ने बताया कि एसएचजी बच्चों के लिए विशेष मास्क तैयार कर रहा है, जिसकी बहुत अधिक मांग है क्योंकि सामान्य चिकित्सकीय मास्क छोटे आकार में नहीं आता है। नौगांव के रूनझुन एसएचजी की सचिव रश्मि रेखा ककाती ने बताया कि शुरुआत में मास्क सामान्य सूती कपड़े से बनाया जा रहा था, लेकिन अब गमोसास का इस्तेमाल किया जा रहा है। गमोसास ऊन से बनता है। मास्कइंडिया से मुहिम में आप भी एक रक्षक बनें, जागरूकता फैलाने में मदद करें, COVID-19 से लड़ने में अपनी भूमिका निभाएं। अपना मास्क बनाएं और उसके साथ अपनी सेल्फी अपलोड करें। सर्वश्रेष्ठ पोस्ट को #MaskIndia पर शेयर किया जाएगा।

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