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18 साल की कांग्रेस से यारी आखिर क्यों लगी अचानक भाजपा प्यारी


ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से कई दिनों से चल रही नोकझोंक को अब खत्म कर दिया है। जिसके कारण से कांग्रेस खेमे में घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस से कई दिग्गज लोगों ने इस्तिफे दे दिए है जिससे कांग्रेस के वजूद पर गहरा संकट छा रहा है। हाल में मध्यप्रदेश में कांग्रेस के रहे दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपना 18 साल पुराना कांग्रेस के साथ राजनीतिक रिश्ता खत्म कर लिया है। मध्य प्रदेश के युवा नेता सिंधिया के इस फैसले से कांग्रेस न सिर्फ संकट में है, बल्कि वो गहरे सदमे में भी है। कांग्रेस का कहना है कि पार्टी ने उन्हें सब कुछ दिया इसके बावजूद सिंधिया ने बगावत की। होली के मौके पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी को इस्तीफा दिया। जिसके चलते मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार गिरने की कगार पर पहुंच गई है। सिंधिया ने इस्तीफे का कारण बताते हुए लिखा है कि वो कांग्रेस में रहते हुए जनसेवा नहीं कर पा रहे थे। साथ ही सिंधिया गुट की तरफ से उन्हें सम्मान न मिलने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं इन्हीं आरोपों का जवाब देने के लिए कांग्रेस की तरफ से सिंधिया से जुड़ा एक ट्वीट किया जिसमें बताया गया कि सिंधिया को राजनीतिक तौर पर कांग्रेस ने क्या-क्या दिया- कांग्रेस ने सिंधिया को क्या दिया?17 साल सांसद बनाया 2 बार केंद्रीय मंत्री बनायामुख्य सचेतक बनाया राष्ट्रीय महासचिव बनायायूपी का प्रभारी बनाया कार्यसमिति सदस्य बनायाचुनाव अभियान प्रमुख बनाया 50+ टिकट, 9 मंत्री दिये।यानी सिंधिया गुट की तरफ से जो आत्मसम्मान और पर्याप्त सम्मान न दिए जाने के जो आरोप लगाए जाते रहे हैं, उन पर कांग्रेस ने बाकायदा लिस्ट देकर करारा जवाब देने की पूरी कोशिश की है। साथ ही कांग्रेस ने यह भी पूछा है कि इतना कुछ देने के बावजूद भी मोदी और शाह की शरण में सिंधिया चले जाने का क्या मतलब है। आपको जानकर हैरानी होगी की इस ट्वीट के साथ कांग्रेस ने जो फोटो शेयर किया है, वो बेहद दिलचस्प है। यह फोटो डिजाइन की गई है, जिस पर ट्रस्ट ब्रेक होना को साफ-साफ दर्शाया गया है। यानी सीधे शब्दों में कांग्रेस ने सिंधिया को भरोसा तोड़ने वाला बताया है।हालांकि, इस्तीफे के तुरंत बाद तो कांग्रेस के कुछ नेताओं ने सिंधिया को गद्दार तक करार दे दिया था। लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा था कि जिस पार्टी ने सिंधिया को महाराज बनाकर रखा, उन्होंने ही पार्टी से गद्दारी की है। ये राजघराने के लोगों को शोभा नहीं देता है। इसी के चलते सिंधिया पर कई तरह के आरोपों की बारिश की गई। लेकिन सिंधिया इन बातों को नजरअंदाज करते हुए नई पार्टी में जाने की ज्यादा खुशी जाहिर कर रहे हैं।

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