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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2020 : संस्कृत, राजस्थानी के साथ गूंजेंगी खासी, असमी और नागामी भाषाएं


जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का 13वां संस्करण 23 से 27 जनवरी तक होगा। फेस्टिवल में इस साल 20 से ज्यादा देशों के 35 भाषाएं बोलने वाले 300 से अधिक वक्ता दर्शकों से रूबरू होंगे। जेएलएफ में इस बार फेस्टिवल में 20 अंतरराष्ट्रीय और 15 राष्ट्रीय भाषाएं शामिल होंगी। जेएलएफ में संस्कृत और राजस्थानी भाषा के सेशन तो होंगे ही, भारत की खासी, असमी और नागामी समेत कई क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्य की गूंज भी सुनाई देगी। इनके अलावा चेक रिपब्लिक, मॉरीशस, नीदरलैंड, स्वीडन और नाइजीरिया के लेखक उपस्थित होंगे। हमेशा की तरह ही बहुत से भारतीय, अमरीकी, ब्रिटिश, फ्रेंच और जर्मन लेखक भी जेएलएफ का हिस्सा बनेंगे।जानकारी के अनुसार मिनिस्ट्री ऑफ आट्र्स एंड कल्चरल हेरिटेज मॉरीशस में प्रेसिडेंट फंड की चेयरपर्सन एवं शिक्षाविद अनिता औजायेब, अंटवेर्प मैनेजमेंट स्कूल की क्रिएटिव डायरेक्टर, कल्चरल पॉलिसी एक्सपर्ट सलाहकार और यूनेस्को कमिशन की सदस्य एनिक शेरेम, आयरलैंड साहित्यकार क्रिस एगी, यांगोन हेरिटेज ट्रस्ट के संस्थापक लेखक पद्म श्री थांट मिंट यू भी जेएलएफ का हिस्सा बनेंगे।जेएलएफ की सह निदेशक नमिता गोखले ने कहा, प्रत्येक वर्ष जेएलएफ के साथ दुनिया के विभिन्न हिस्सों से राष्ट्रीयता और भाषाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले लेखक जुड़ते हैं। इस साल एक बार फिर से हमने ज्यादा से ज्यादा भिन्न विषयों और भाषाओं के वक्ताओं को आमंत्रित करने का प्रयास किया है। 20 से ज्यादा देशों के 35 भाषाएं बोलने वाले 300 से अधिक वक्ता फेस्टिवल का हिस्सा बनने जा रहे हैं। डिग्गी पैलेस में जेएलएफ की तैयारियां चल रही हैं।

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