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जानिए भारतीय सेना दशहरा पर क्यों करती है शस्त्र पूजा, आज भारत को मिला ये ब्रह्मास्त्र


भारत और पूरी दुनिया में बसे भारतीय आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी मनते हैं। इस दिन देवी अपराजिता की पूजा की जाती है। इस पूजा में मां रणचंडी के साथ रहने वाली योगनियों जया और विजया को पूजा जाता है। इनकी पूजा में अस्त्र-शस्त्रों को सामने रखकर पूजा करने की परंपरा रामायण और महाभारत काल से चली आ रही है। भारतीय सेना भी इस परंपरा को निभाती है और विजयादशमी के दिन अस्त्र-शस्त्र की पूजा करती है।इसी उपलक्ष्य में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस बार फ्रांस में शस्त्र पूजा कर रहे हैं, क्योंकि वो फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान लेकर आ रहे हैं। राफेल भारत के लिए ब्रह्मास्त्र है जो पूर्वोत्तर भारत यानी अरूणाचल प्रदेश और चीन से सटे अन्य राज्यों की सीमाओं पर तैनात होगा। आज से ही भारत को दुनिया के सबसे खतरनाक लड़ाकू विमानों यानी राफेल की डिलीवरी मिलनी हो गई है। भारत यह फ्रांस से हजारों करोड़ रूपयों का सौदा है जो भारतीय वायुसेना को अत्यधिक शक्तिशाली बना देगा।राजनाथ सिंह पहले शस्त्र पूजा के तहत राफेल की पूजा करेंगे और फिर इसी लड़ाकू विमान में एक उड़ान भी भर रहे हैं।। 8 अक्टूबर को वायुसेना दिवस भी है। इस दिन राजनाथ सिंह वायुसेना को राफेल का तोहफा भी देने जा रहे हैं। दशहरे के दिन शस्त्र पूजा करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। प्राचीन समय में राजा अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए इस दिन शस्त्र पूजन करते थे। भारतीय सेना भी हर साल दशहरे के दिन शस्त्र पूजा करती है। इस पूजा में सबसे पहले मां दुर्गा की दोनो योगनियां जया और विजया की पूजा होती है फिर अस्त्र-शस्त्रों को पूजा जाता है। इस पूजा का उद्देश्य सीमा की सुरक्षा में देवी का आशीर्वाद प्राप्त करना है। रामायण काल से ही शस्त्र पूजा की परंपरा चली आ रही है। भगवान राम ने भी रावण से युद्ध करने से पहले शस्त्र पूजा की थी।शस्त्र पूजा के समय शस्त्रों को इकट्ठा किया जाता है फिर उन पर गंगाजल छिड़का जाता है। इसके बाद सभी शस्त्रों को हल्दी व कुमकुम का तिलक लगाकर फूल अर्पित किए जाते हैं। शस्त्र पूजा में शमी के पत्ते का बहुत महत्व है। शमी के पत्तों को शस्त्रों पर चढ़ाकर उनकी पूजा की जाती है।

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