NRC के लिए इस अधिकारी ने छह साल से नहीं देखी एक भी फिल्म

इस वक्त पूरे देश में जिस नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) की चर्चा है, उसकी प्रमुख धुरी हैं प्रतीक हजेला। प्रतीक हजेला असम एनआरसी के संयोजक हैं। पूरे असम में एनआरसी का बेड़ा उनके ही सिर पर रहा। ज्ञात हो कि कल एनआरसी की अंतिम सूची प्रकाशित कर दी गई है, जिसमें 19 लाख लोगों के नाम नहीं हैं। आइए अब जानते हैें प्रतीक हाजेला से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें।निभाएं हैं महत्वपूर्ण तथ्यअसम-मेघालय कैडर के 1995 बैच के आइएएस हजेला जुलाई 1996 में पहली बार असिस्टेंट कमिश्नर के तौर पर असम के सिलचर में आए थे। सिलचर असम के बंगाली बहुल काछार जिले का मुख्यालय था। सितंबर 2013 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने हजेला को कमिश्नर बनाया और फिर वह असम के गृह और राजनीतिक विभाग के सचिव भी बनाए गए। उन्होंने तब एनआरसी को अपडेट किए जाने की प्रक्रिया में रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के तहत राज्य संयोजक की भूमिका भी बतौर नोडल अधिकारी निभाई।अकेले तैयार किया पूरा ढांचाअपनी नियुक्ति के छह महीने बाद हजेला ने अकेले ही एनआरसी प्रक्रिया का आधारभूत ढांचा खड़ा कर दिया था और अगस्त 2014 तक 10-12 लोगों की कोर टीम भी बना ली थी। इसमें किसी भी व्यक्ति के पुरखों के बारे में मैपिंग डिजिटल डेटासेट्स से की जा सकती थी और यह डेटासेट्स दशकों पुराने दस्तावेजों के आधार पर तैयार किए गए थे। इसके बाद व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर वेरीफिकेशन कराने का तरीका क्या होगा इसे भी तय किया गया। सभी के पीछे दिमाग हजेला का ही था। लिस्ट में नहीं था हजेला का नामहजेला ने भी एनआरसी के लिए आवेदन किया था और जब 31 दिसंबर, 2017 को पहला ड्राफ्ट जारी हुआ तो उसमें उनका और उनकी बेटी का नाम नहीं था। राज्य में लाखों लोगों की तरह यह पिता-पुत्री भी मई 2018 में गुवाहाटी में सुनवाई के लिए पहुंचे थे। उसके बाद उनका नाम अंतिम ड्राफ्ट में शामिल हुआ था।3.3 करोड़ लोगों की थी जिम्मेदारीएनआरसी असम के संयोजक के तौर पर प्रतीक हजेला के पास 3.3 करोड़ लोगों के 6.6 करोड़ कागजात की छानबीन की जिम्मेदारी थी। ये कागजात असम के नागरिकों ने इसलिए लगाए थे ताकि वे साबित कर सकें कि वे 24 मार्च, 1971 के पहले से भारत में रह रहे हैं।संगीत और फिल्मों का रखते हैं शौकप्रतीक हजेला को फिल्में देखने का भी शौक है, लेकिन जबसे उन्होंने एनआरसी का काम संभाला है वह एक भी फिल्म देखने नहीं जा सके हैं। हजेला संगीत के भी शौकीन हैं। उन्हें जगजीत सिंह और मेहंदी हसन की गजलें पसंद हैं। वह सटीक और स्पष्ट बात करना पसंद करते हैं।
from Daily News : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2ZHiufu
कोई टिप्पणी नहीं