मैरी कॉम को पद्म विभूषण देने की सिफारिश, जानिए उनके जीवन की खास बातें

भारतीय खेल इतिहास में पहली बार एक महिला एथलीट को देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म विभूषण देने की सिफारिश की गई है। खेल मंत्रालय ने छह बार की वर्ल्ड चैंपियन बॉक्सर एमसी मैरीकॉम का नाम आगे किया है। मैरीकॉम को 2013 में पद्म भूषण और 2006 में पद्म श्री से सम्मानित किया जा चुका है।इससे भी दिलचस्प तथ्य यह है कि खेल मंत्रालय की ओर 9 एथलीट के नाम पद्म सम्मान के लिए भेजे गए हैं और सभी नाम बेटियों के हैं। वर्ल्ड चैंपियन बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु का नाम पद्म भूषण के प्रस्तावित किया गया है, जो कि देश का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। जानिए कौन हैं मैरी कॉममेरी कॉम भारत की प्रसिद्ध बॉक्सर (मुक्केबाज) हैं। बॉक्सिंग में उन्होंने भारत को विश्व में महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है। मेरी कॉम का पूरा नाम मैंगते चंग्नेइजैंग मैरी कॉम है। उन्होंने 10 बार राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीती है। विश्व गैर व्यवसायिक बॉक्सिंग चैंपियन्शिप में वो 5 बार विश्व विजेता रह चुकी है। वह एकमात्र खिलाड़ी है, जिसने 6 विश्व बॉक्सिंग चैंपियन्शिप में हर बार कोई न कोई मेडल जीता है। 2012 के समर ओल्प्म्पिक में उन्होंने 51 किग्रा वजन में कांस्य पदक जीता। AIBA विश्व महिला बॉक्सिंग खिलाड़ी की रेंकिंग में वो चौथे स्थान पर आती है।उनका जन्म 1 मार्च 1983 को मणिपुर (भारत) में चुराचांदपुर जिले में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी आरंभिक शिक्षा लोकटक क्रिश्चियन मॉडल स्कूल और सेंट हेवियर स्कूल से प्राप्त की। उच्च शिक्षा के लिए मेरी इम्फाल चली गयी। उनको बचपन से ही खेलों में बहुत रूचि थी। मैरी कॉम ने बॉक्सिंग की शुरुआत 18 साल में कर दी थी। 1999 में उन्होंने खुमान लम्पक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में पहली बार बॉक्सिंग का मैच देखा तो देखते ही रह गयी। यही वो खेल था जिसमे वो आगे चलकर देश का नाम रोशन करने वाली थी। बॉक्सिंग रिंग में लड़के लड़कियों को बोक्सिंग करते मेरी सोचने लगी की वो भी ये खेल खेल सकती है।बॉक्सिंग में करियरबॉक्सिंग में दिलचस्पी लेने के बाद मेरी कॉम जी- जान से इसकी तैयारी में लग गई। 1998 में मणिपुर के बॉक्सर डिंगको सिंह ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। इससे मेरी कॉम को बहुत प्रेरणा मिली। घरवालों को मनाना इतना आसान नहीं था। मणिपुर में बॉक्सिंग को पुरुषों का खेल समझा जाता था। उन्होंने अपने घर वालों को बिना बताए ही बॉक्सिंग की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी थी। वो देर रात तक बॉक्सिंग रिंग में प्रैक्टिस करती रहती थी। सन 2000 में मैरी कॉम ने विमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप मणिपुर में जीत हासिल की। उनका नाम मणिपुर के सभी अखबारों में प्रकाशित हुआ। तब जाकर उनके घर वालों को मैरी कॉम के बॉक्सिंग के शौक के बारे में पता चला। उनके घर के सदस्य उनकी जीत पर बहुत खुश थे।पुरस्कार और उपलब्धियां2001 – पहली बार नेशनल वुमन्स बॉक्सिंग चैंपियनशिप विजेता2003- अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित2006- पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित2007 – लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड द्वारा “पीपल ऑफ द ईयर” पुरस्कार से सम्मानित2008- पेप्सी एमटीवी (MTV) यूथ आईकॉन2008 AIBA द्वारा मैग्नीफिसेंट मैरी पुरस्कार से सम्मानित2009- राजिव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित2010 सहारा स्पोर्ट्स अवॉर्ड द्वारा “स्पोर्ट्स विमेन ऑफ द ईयर” पुरस्कार से सम्मानित2012 – लंदन ओलम्पिक में कांस्य पदक विजेता2014- एशियाई खेलों में सवर्ण पदक विजेता2018- मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वीरांगना पुरस्कार से सम्मानित
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