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Birthday Special: ज्योति बसु के बाद सबसे अधिक समय तक CM रहने का रिकॉर्ड है चामलिंग के नाम


सिक्किम को विकास की पटरी पर दौराने वाले पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग का 22 सितंबर यानी आज जन्मदिन है। चामलिंग के नाम किसी राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड है। इससे पहले यह रिकॉर्ड माकपा के ज्योति बसु के नाम था। सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के 69 वर्षीय संस्थापक अध्यक्ष चामलिंग 25 सालों(1994-2019) तक सिक्किम के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दी। अपनी विकास नीतियों की वजह से ही चामलिंग 25 सालों तक राज किया। चामलिंग ने 12 दिसंबर, 1994 को पहली बार सिक्किम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।दक्षिण सिक्किम के यानगांग में 22 सितंबर, 1950 को जन्मे चामलिंग ने मैट्रिक के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। उन्होंने महज 32 वर्ष की आयु में राजनीति में प्रवेश किया था। चामलिंग नरबहादुर भंडारी के मंत्रिमंडल में 1989 से 1992 के बीच उद्योग एवं जनसंपर्क मंत्री रहे। सिक्किम में लंबे समय की राजनीतिक उथल-पुथल के बाद उन्होंने 1993 में एसडीएफ का गठन किया। बता दें कि ज्योति बसु 21 जून, 1977 से छह नवंबर, 2000 के बीच पांच बार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे। बसु का 95 वर्ष की आयु में 2010 में निधन हो गया था।उत्तर पूर्व के सबसे शांत, ख़ूबसूरत, संपन्न और शिक्षित राज्य के नेता के तौर पर एक नया रिकॉर्ड बनाने वाले सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग बेदाग राजनीतिक छवि और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की ललक के साथ सत्ता के अजेय रथ पर सवार थे और ख़ुद उनके विरोधी तक मानते हैं कि उनसे मुक़ाबला मुश्किल है। एक सामान्य नेपाली परिवार में जन्मे चामलिंग को जनता के साथ सीधे जुड़ाव ने देश के किसी राज्य में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाला मुख्यमंत्री बना दिया। राजनीति के माहिर खिलाड़ी चामलिंग ने अपने गुरु और पूर्व मुख्यमंत्री नर बहादुर भंडारी के ख़िलाफ़ बग़ावत का बिगुल फूंका और उन्हें सत्ता से बेदख़ल कर उनकी कुर्सी पर क़ब्ज़ा कर लिया। शायद इसी लिए उन्हें बागियों से निपटने की कला में माहिर माना जाता है।उनका यह हुनर 2014 में काम आया जब उनके पूर्व सहयोगी और एसकेएम के नेता प्रेम सिंह तमांग ने उनके ख़िलाफ़ बग़ावत कर दी। लेकिन तमांग को यह बग़ावत बहुत भारी पड़ी और कुछ समय की राजनीतिक उठापटक के बाद आख़िरकार उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाना पड़ा। चामलिंग पहली बार 12 दिसंबर, 1994 को मुख्यमंत्री बने थे और उसके बाद से सत्ता के गलियारों पर उनका क़ब्ज़ा बरक़रार है। वे लगातार पांच कार्यकाल तक सिक्किम के मुख्यमंत्री रहे। वैसे इस बात में भी दो राय नहीं कि चामलिंग इसलिए अजेय नहीं थे कि उन्हें चुनौती देने वाली कोई मज़बूत शख़्सियत नहीं था। दरअसल चामलिंग के शासन का तरीका और राज्य में किए गए विकास कार्यों ने उन्हें जनता के बीच इस क़दर लोकप्रिय बना दिया है कि जनता को उनके सिवाय कोई दिखता ही नहीं था।चामलिंग का जन्म 22 सितंबर, 1950 को सिक्किम के एक छोटे और बेहद पिछड़े गांव यंगयंग में हुआ था। पवन कुमार चामलिंग ने केवल मैट्रिक तक ही पढ़ाई की है। वर्ष 1972 में राजनीति में आने से पहले वह किसान और प्रथम श्रेणी के ठेकेदार रह चुके हैं। पवन कुमार चामलिंग नेपाली भाषा के एक सम्माननीय लेखक हैं। इनका साहित्यिक नाम पवन कुमार चामलिंग ‘किरण’ है।

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