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जब 86 किलो वजन उठाकर मीराबाई चानू ने तोड़ा था अपना ही रिकॉर्ड


भारत की विश्व चैंपियन भारोत्तोलक मीराबाई चानू आज अपना जन्मदिन मना रही है। इंफाल से 20 किलोमीटर दूर नोंग्पोक काकचिंग गांव में 8 अगस्त 1994 को हुआ था। गरीब परिवार में जन्मी मीराबाई 6 भाई बहनों में सबसे छोटी हैं। चानू ने 12 साल की उम्र में ही अपने हुनर का परिचय दे दिया था। आज चानू के जन्मदिन के मौके पर आपको बता दें कि गोल्ड कोस्ट में कैसे उन्होंने अपना ही रिकाॅर्ड तोड़ा था। दो बार तोड़ा अपना रिकॉर्डचानू ने 2018 में गोल्ड कोस्ट में खेले गए 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में 86 किलोग्राम वजन उठाकर दो बार अपनी ही रिकॉर्ड तोड़ दिया। मीरा बाई चानू ने अपने पहले ही प्रयास में 80 किलोग्राम वजन उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स का रिकॉर्ड बनाया था, जबकि पिछला रिकॉर्ड 77 किलोग्राम का था जो कि अगस्तानिया ने बनाया था। इसके बाद दूसरे प्रयास में उन्होंने बड़ी ही आसानी से 84 किलोग्राम वजन उठा दिया। दूसरी कोशिश में 84 किग्रा वजन उठाकर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा। तीसरी और आखिरी कोशिश में 86 किग्रा वजन उठाकर दूसरी बार अपने ही रिकॉर्ड से आगे निकल गईं। भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में चानू ने दो पदक हासिल किए। इससे पहले वेटलिफ्टर गुरुराजा पुजारी ने 56 किलोग्राम कैटेगरी में 249 किग्रा वजन उठाया। चानू ने की मल्लेश्वरी की बराबरीकर्णम मल्लेश्वरी के बाद चानू वर्ल्ड चैम्पियन बनने वालीं दूसरी भारतीय वेटलिफ्टर हैं। उन्होंने यह एचीवमेंट नवंबर 2017 में हासिल किया था। तब उन्होंने 194 किग्रा (स्नैच में 85 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 109 किग्रा) वजन उठाया था।2014 कॉमनवेल्थ में जीता था सिल्वरमीरा बाई चानू ने पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स जो कि 2014 ग्लास्गो में खेले गए थे उसमे चानू ने 48 किलो वर्ग में देश के लिए रजत पदक जीता था। पिछले कॉमनवेल्थ में 48 किलोग्राम की कैटेगरी में गोल्ड और सिल्वर दोनों ही मेडल भारत के नाम रहे थे। उस वक्त महज 20 साल की रहीं संजीता चानू ने भारत की ही मीराबाई चानू को पीछे छोड़ते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।मणिपुर की ‘पावरवुमन’ का संघर्ष मीराबाई चानू ने मणिपुर की महिला वेटलिफ्टर कुंजुरानी देवी को देखकर इस खेल में करियर बनाने का सोचा। चानू ने साल 2007 में जब प्रैक्टिस शुरू की तो उनके पास वजन उठाने के लिए लोहे की रॉड नहीं थी, जिसके बाद उन्होंने बांस से ही प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया। ट्रेनिंग के लिए वे रोजाना 50-60 किलोमीटर दूर जाया करती थीं। इसके बाद 11 साल की उम्र में वे अंडर-15 और 17 साल में जूनियर चैम्पियन बनीं। चानू ने 31 अगस्त, 2015 में रेलवे ज्वाइन की। वे वहां सीनियर टिकट कलेक्टर के पद पर हैं। बेहतरीन खेल के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है।

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