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सब्जी बेचकर मां ने बनाया बॉक्सर, बेटी जमुना बोरो ने तोहफे में दिया गोल्ड मेडल


23वें प्रेजिडेंट कप में असम की युवा और प्रतिभावान महिला बॉक्सर जमुना बोरो ने रविवार को 54 किग्रा वर्ग के फाइनल में इटली की अनुभवी ग्युलिया लमाग्ना को 5-0 से हराकर सोने का तमगा अपने नाम कर लिया। जमुना की इस शानदार जीत पर असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने उन्हें बधाई दी है। जमुना के अलावा रविवार को 8 बार की विश्व चैंपियन एमसी मेरी कॉम (51 किग्रा) और 2018 विश्व चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता सिमरनजीत कौर (60 किग्रा) ने रविवार को इंडोनेशिया के लाबुआन बाजो में स्वर्ण पदक जीते, जिससे भारतीय मुक्केबाजों ने 23वें प्रेजिडेंट कप में अपने अभियान का अंत 9 पदक के साथ किया।असम के छोटे से गांव में की रहने वाली जमुना जब दस साल की थी तब उसके सिर से पिता का हाथ उठ गया। पर मां की हिम्मत और उसके बुलंद इरादों ने उसे देश की बेहतरीन मुक्केबाज बना दिया। असम के शोणितपुर जिले में छोटे से गांव में जन्मी जमुना बोडो आज भारतीय महिला मुक्केबाजी में जाना पहचाना नाम बन गई हैं। इससे पहले भी जमुना के मुक्के का दम दुनिया कई बार देख चुकी है।पिता के देहांत के बाद घर चलाने के लिए जमुना की मां ने सब्जी बेचने का फैसला किया। मां बेलसिरी गांव के रेलवे स्टेशन के बाहर सब्जी बेचने लगी। इस तरह से जिंगदी पटरी पर लाने की कोशिश शुरू हो गई। जमुना स्कूल जानें लगी और मां बड़ी बहन की शादी कर दी। इसके अलावा उनका बड़ा भाई है जो पूजा पाठ का काम करता है। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनने के बावजूद उन्हें अब भी पैसों की बड़ी परेशानी होती है। देश में ट्रैवल करने के लिए घर से पैसे मांगने पड़ते हैं। साल 2013 जमुना के लिए बेहद खास रहा। उस साल सर्बिया में इंटरनेशनल सब जूनियर गर्ल्स बॉक्सिंग टूर्नामेंट में उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर देश को एक बड़ा तोहफा दिया। इसके बाद साल 2014 में रूस में बॉक्सिंग टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीकर वह चैंपियन बनीं। 2015 में ताइपे में यूथ वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता।

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