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देवदूत से कम नहीं है ये आईएएस अधिकारी,बाढ़ के दौरान किया शानदार काम


शिलॉन्ग। मेघालय में भारी बारिश के कारण हालात बाढ़ के हालात हैं। राज्य के करीब 1 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। जुलाई के पहले सप्ताह में मेघालय के कुछ इलाकों में मूसलाधार बारिश शुरू हुई थी जो अगले सात दिन तक जारी रही। इससे हालात बिगड़ गए। राज्य के सरकारी अधिकारियों ने आपदा से निपटने के लिए अपने विभागों को पहले से ही तैयार रखा था। इन सरकारी अधिकारियों में से एक हैं आईएएस राम सिंह, जो वेस्ट गारो हिल्स के उपायुक्त हैं। राम सिंह राहत शिविरों और राशन की व्यवस्था के अलावा एक गांव से दूसरे गांव जा रहे हैं और बाढ़ प्रभावितों का हाल चाल जान रहे हैं। आईएएस राम सिंह ने खुद संभाला मोर्चा,ली बोट राइडबकौल सिंह, 8 जुलाई से भारी बारिश हो रही है। असम और बांग्लादेश की सीमा से लगे मैदानी इलाकों में बहुत बड़ी आबादी रहती है। जब भी ब्रह्मपुत्र नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगती है तो ये मैदानी इलाके अक्सर पानी से घिर जाते हैं। बाढ़ आने से कुछ दिन पहले मैंने मैदानी इलाकों में बह रही नदी में बोट राइड ली और चेतावनियां जारी की। हमने राहत शिविरों, रेस्क्यू टीमों की तैयारियां शुरू की। इसके अलावा नावों का भी इंतजाम किया। बाढ़ आने से दो दिन पहले एसडीआरएफ को बुलाया गया, ताकि पहले से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जाए। हमने 14 जुलाई को बाढ़ घोषित की, उस वक्त बाढ़ ने करीब 150 गावों को अपनी चपेट में ले लिया था। राहत की बात यह रही है कि तब तक किसी की जान नहीं गई। बकौल राम सिंह, पहले जारी की गई चेतावनियों और प्रिवेंटिव एक्शन के अलावा हमने निर्दिष्ट राहत शिविरों का इंतजाम किया, यह जानते हुए कि ज्यादातर लोग शिफ्ट होने से मना कर देंगे। हमने उनके गांवों के पास स्थित तटबंध और सडक़ों के किनारे बेस बनाए। जब लोगों को महसूस हुआ कि चेतावनियां गंभीर है और शिविरों में मेडिकल चेक अप से लेकर हर तरह का इंतजाम है तो वे अपना सामान लेकर राहत शिविरों में पहुंचे। एक लाख लोग रह रहे हैं राहत शिविरों में सिंह खुद बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर रहे हैं और स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। वह पीन के पानी के इंतजाम भी देख रहे हैं और बाशिंदों के साथ कन्टिन्जंसी प्लान पर चर्चा कर रहे हैं ताकि वे सुरक्षित शरण के लिए बेस्ट विकल्पों को समझ सकें। सिंह ने बताया कि हम उन्हें राशन, बेबी फूड, पानी, तिरपाल और जरूरी सप्लाई मुहैया करा रहे हैं। हम हाइजीन, सैनिटेशन और हेल्थ इश्यूज का भी ध्यान रख रहे हैं। सिंह ने बताया कि कुछ एनजीओ भी वहां काम कर रहे हैं। अभी तक इम्पैक्ट काफी पॉजिटिव रहा है। एक सप्ताह से करीब एक लाख मेघालय के नागरिक राहत शिविरों में रह रहे हैं लेकिन पानी उतरते ही कुछ लोग अपने गांव चले गए हैं।

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