2030 तक नहीं पूरा हो पाएगा सरकार का इलेक्ट्रिक व्हीकल्स वाला सपना, ये है बड़ी वजह
नई दिल्ली: भारत सरकार 2030 तक देश में पूर्ण रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाना चाहती है, और इसके लिए सरकार जोर-शोर से कदम भी उठा रही है। इलेक्ट्रिक कारों पर जहां एक ओर सरकार जीएसटी घटाने की बता कर रही है वहीं Fame 1 और 2 जैसी योजनाओं के तहत भी इलेक्ट्रिक कार और बाइक खरीदने वालों को अच्छी खासी छूट मिल सकती है । साथ ही यह भी प्रस्तावित है कि 2025 के बाद देश में बेचे जाने वाले 150 सीसी के क्षमता के दोपहिया और तीन पहिया वाहन इलेक्ट्रिक वाहन होने चाहिए। लेकिन इस सबके बावजूद सरकार का ये सपना पूरा होने में वक्त लग सकता है । और इसकी सबसे बड़ी वजह कस्टमर्स की स्वीकार्यता होगी।
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अगले 10 वर्षों में ई-वाहनों पर स्विच करने के लिए सरकार का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल है। क्योंकि उपभोक्ताओं को बदलाव को स्वीकार करने के लिए समय की आवश्यकता होगी।
टीईआरआई के प्रमुख अजय माथुर का कहना है कि "'हमें पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग, जीएसटी ( GST ), व्यापार मॉडल को कम कर ई वाहनों से स्थानंतरित करने में आने वाले बाधाओं से निपटने की योजना पर काम करना होगा। हालांकि अभी यह भी साफ नहीं किया गया है कि 2023-25 के इस लक्ष्य का आधार क्या है।'’
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अजय माथुर ने सरकार को योजना बद्ध तरह से काम करने और अपने सपने को साकार करने के लिए कुछ उपाय भी बताए जैसे-
सार्वजनिक वाहन के तौर पर हो इलेक्ट्रिक व्हीकल का इस्तेमाल-
इलेक्ट्रिक व्हीकल का इस्तेमाल सार्वजनिक वाहनों के रूप में होना चाहिए। बस और टैक्सी जैसे कमर्शियल वाहन के तौर पर ई- व्हीकल का इस्तेमाल करना चाहिए। क्योंकि इनकी वजह से ही सबसे अधिक प्रदूषण फैलता है।
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चार्जिंग की हो पूरी व्यवस्था-
सरकार पहले ई-चार्जिंग के बुनियादी ढांचे का वैकल्पिक व्यापार मॉडल पेश करना चाहिए, जिससे ईवीएस में बदलाव के लिए हम पूरी तरह से तैयार हो। क्योंकि आज की तारीख में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की कीमत ही नहीं उनकी चार्जिंग भी बड़ा सवाल है।
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