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पिता की मौत के बाद भी इस खिलाड़ी ने देश के लिए बड़ा फैसला, जापान में करेंगी सबसे बड़ा काम


भारतीय महिला हॉकी टीम की युवा फॉरवर्ड खिलाड़ी 19 वर्षीय लालरेमसियामी ने अपने पिता के निधन के बावजूद भी हिरोशिमा में चल रहे FIH सीरीज के सेमीफाइनल और फाइनल मैच में खेलने का फैसला किया। खिलाड़ी के इस फैसले की हर तरफ प्रशंसा की जा रही है। लालरेमसियामी ने देश के साथ-साथ अपने राज्य मिजोरम का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। शुक्रवार की सुबह उन्हें उनके पिता के निधन की खबर मिली। इसके बावजूत उन्होंने अपने दोनों आगामी मैच खेले। इस दुख की घड़ी में कप्तान सहित पूरी टीम ने उन्हें ढांढस बंधाया। जिसके बाद टीम ने सेमीफाइनल में चिली को हराकर ओलंपिक क्वालीफायर का टिकट पाया। साथ ही एफआईएच सीरीज केफाइनल में जापान पर भी शानदार जीत हासिल की।खेल के प्रति अपने समपर्ण और देशभक्ति ने खिलाडी को स्टार बना दिया है। बता दें कि खिलाडी के पिता ललथनसंगा ज़ोटे का दिल का दौरा पड़ने के कारण 21 जून, 2019 को निधन हो गया था। अपने साथियों के मध्य सियामी के नाम से प्रसिद्द खिलाडी, पिता का अंतिम संस्कार होने के समय मैदान पर जा रही थी। 22 जून को हुए भारत चिली मैच में चिली को 4-2 से हराकर टीम को फाइनल में पहुंचाने में सिआमी का बड़ा योगदान था। इस जीत से भारत ओलंपिक में अपना नाम क्वालीफाई करने में सफल रहा। खिलाड़ी के इस समपर्ण को देखकर केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू ने खिलाड़ी के पिता की मृत्यु पर अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर शोक व्यक्त किया। ट्वीट्स की एक श्रृंखला में केंद्रीय मंत्री ने टीम इंडिया को बधाई दी और भारत के इस जीत पर ओलंपिक क्वालीफायर के लिए क्वालिफाई करने के लिए लालरेमसियामी के समर्पण को सलाम किया।लालरेमसियामी के बारे में महत्वपूर्ण बातें लालरेमसियामी पेशेवर रूप से हॉकी खिलाड़ी है, जो भारतीय राष्ट्रीय टीम में फारवर्ड खिलाड़ी है। वह अपने साथियों द्वारा सियामी के नाम से जानी जाती है। लालरेमसियामी ने टूर्नामेंट में भारत के 20 में से दो गोल किए हैं और वह 2019 में अपने 50 अंतर्राष्ट्रीय कैप पूरे कर चुकी है।उसने चिली को 4-2 से हराने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, यह एक ऐसी जीत है, जिसने न केवल टीम को फाइनल में भेजा बल्कि ओलंपिक क्वालीफायर में भारत के लिए स्थान भी पक्का किया। लालरेमसियामी 18 सदस्यीय टीम का हिस्सा थी जिसने 2018 विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। वह मिजोरम से पहली खिलाड़ी हैं जिन्होंने सिल्वर जीतकर, एशियाड पदक भी अपने नाम किया। उन्होंने अपने खेल करियर की शुरुआत 11 साल की उम्र से की थी। उन्हें तब सेज़वेल, सेर्चिप में मिज़ोरम सरकार द्वारा संचालित एक हॉकी अकादमी में शामिल होने के लिए चुना गया था। 2016 में, वह नई दिल्ली में राष्ट्रीय हॉकी अकादमी में शामिल हुईं।

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