इन लड़कियों को लगता है अपनी जवानी से डर, कारण हिला देगा आपका दिमाग

भारत कई अजूबो का गढ़ माना जाता है यहां कई तरह की संस्कृति, भाषा और धर्म के लोग रहते हैं तो ऐसे मेंकई बार कुछ बातें या रिवाज हमारे सामने आ ही जाते हैं जो हमें अचरज में डाल देते हैं आज कुछ ऐसी ही जनजाति के बारे में हम आपको बातएंगे जिनके बारे में शायद ही आपने कभी सुना हो. अरुणाचल प्रदेश के लोअर सुबनसिरी जिले में ‘जीरो’ प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर एक छोटी सी घाटी है जिसे आपातानी जनजाति समुदाय का घर कहा जाता है। यहां की महिलाएं नाक की दोनों तरफ अजीब सा नथुना पहनती है और अपने चेहरे पर टैटू गुदवाती है जो देखने में बेहद अजीब और डरावना कागता है लेकिन ये इनकी संस्कृति का एक हिस्सा है परन्तु ऐसा करने से महिलाओं की सुंदरता पर इसका गहरा असर पड़ता है. लेकिन आज के समय में ये रिवाज लगभग खत्म सा हो गया है आज की जनरेशन की लड़कियों से ने इस रूढ़िवादी नियमो से ऊपर उठ कर इस रिवाज से किनारा कर लिया है यह समुदाय दुनिया के उन समुदायों में से एक है जो प्रकृति (सूर्य, चंद्र) की पूजा करता है। यह समुदाय सतत कृषि (sustained farming) और सामाजिक वानिनी (social forestry) के लिए प्रसिद्ध है। अप्रैल 2014 में आपातानी को जीरो के यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट में उच्च उत्पादन और प्रकृति संरक्षण की अद्वितीय प्रणाली के लिए शामिल किया गया।आपातानी समुदाय कृषि जीवी है। यह लोग धान की खेती में सतत और प्रभावशाली प्रणाली अपनाए जाने के लिए प्रसिद्ध है।यहां के खेत स्पाट जमीन पर बने है इसलिए मछली पालन के साथ ही यहाँ गीली धान की खेती की जाती है। यहाँ के खेतों में सिंचाई प्रभावशाली चैनलों और नहरों से की जाती है। खेतों में पशुओँ या मशीनों का इस्तेमाल नहीं होता बल्कि प्राकृतिक और सतत प्रणाली (sustained methods) के उपयोग पर अधिक ध्यान दिया जाता है।यहाँ के लोग बांस से बने घरों में रहते है जिन्हें बस्ती कहा जाता है। यहाँ के सभी घर पारंपरिक ढंग से निर्मित है। घर के बीच में बना किचन न केवल खाना पकाने की जगह है बल्कि यहाँ लोग इकट्ठा होकर और बीच में अलाव जलाकर एक दूसरे के साथ गपशप करते है, टीवी देखते है और तरह-तरह के मनोरंजन करते हैं।
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