ऑटोमैटिक कारों में क्यों दिया गया होता है न्यूट्रल गियर, जानें कैसे करता है ये काम
आज के समय में ज्यादातर कारों में ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का ऑप्शन दिए जाने लगा है। ऑटोमैटिक गियरबॉक्स मैनुअल गियरबॉक्स से काफी हद तक अलग होता है, जिसकी लेकर सभी ड्राइवरों के मन में आशंका रहती है। ऑटोमैटिक गियरबॉक्स में न्यूट्रल गियर दिया गया होता है और जिसको देखकर लोगों के मन में ये सवाल आता है कि आखिर न्यूट्रल गियर क्यों दिया गया है और इसका काम क्या होता है। आज हम यहां जानेंगे कि ऑटोमैटिक गियरबॉक्स वाली कार में न्यूट्रल गियर का क्या काम होता है।
ऑटोमैटिक कारों में न्यूट्रल गियर की अपनी एक अलग ही वेल्यू ही होती है। इमरजेंसी के टाइम पर न्यूट्रल गियर कार में बैठे लोगों की जान बचाने के काम आता है। सबसे पहले हम ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के बारे में बात करेंगे। ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन में ड्राइवर को खुद बार-बार गियर बदलने के लिए क्लच दबाकर गियर बदलने की जरूरत नहीं पड़ती है। ऑटोमेटिक गियर बाक्स में गियर कार की पावर और स्पीड बढ़ने पर अपने आप लगता है। इसमें ड्राइवर का गियर पर कोई बी कंट्रोल नहीं होता है।
ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन में गियर स्पीड पर डिपेंड करता है और उसके अनुसार ही बढ़ता घटता है। इंजन जब ज्यादा शक्ति की डिमांड करता है तो ऑटोमेटिक गियर बदलने लगते हैं। ऑटोमैटिक कारों में न्यूट्रल गियर लगने पर इंजन और पहियों के बीच पावर का रिश्ता खत्म हो जाता है। इसके बाद चाहे एक्सीलेटर को कितना भी दबाया जाए, लेकिन पहियों तक पावर नहीं पहुंचती है। ऑटोमैटिक कार में गियर को न्यूट्रल में शिफ्ट करने के बाद कार को रोकने के लिए ब्रेक्स पर ज्यादा प्रेशर देना पड़ता है।
अगर आपको तेज रफ्तार में कार चलाते वक्त अचानक ब्रेक लगाना पड़ जाए तो कार को न्यट्रल गियर पर कर लेना चाहिए। ब्रेक फेल होने पर ऑटोमैटिक कार में इंजन को बंद नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे स्टीयरिंग व्हील कंट्रोल से बाहर हो जाएगा।
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