जानिए कब और कैसे बना था पेरिस का एफिल Tower , है रोचक कहानी

फ्रांस के उत्तर में सीन नदी के तट पर बसा है सपनों का शहर–पेरिस। फ्रांस की राजधानी पेरिस को रोशनी का शहर और फैशन की राजधानी भी कहा जाता है।घूमने के लिहाज से वैसे तो पूरे पेरिस शहर में कहीं भी चले जाइए, हर जगह खूबसूरती बिखरी मिलेगी, लेकिन एफिल टॉवर की बात ही निराली है।एफिल टॉवर को फ्रांस की क्रांति की एक शताब्दी पूरी होने का जश्न मनाने के लिए 1889 में पेरिस में एक वर्ल्ड फेयर का आयोजन किया जा रहा था।इस के मुख्यद्वार के रूप में एक बड़ा और भव्य टॉवर बनाने का प्लान बनाया गया, जिसे बाद में तोड़ दिया जाना था। जिस कंपनी ने इस का निर्माण किया, उस के मुख्य इंजीनियर एलैक्जैंडर गुस्ताव एफिल के नाम पर इस का नाम एफिल टॉवर रखा गया। लोहे के जालदार काम से बनी इस संरचना की ऊंचाई 1,063 फुट है, जिस में 3 लैवल हैं और 1,665 सीढि़यां हैं। हर लैवल पर जाने के लिए अलग अलग लिफ्ट की व्यवस्था है। पहली 2 मंजिलों पर रैस्टोरैंट आदि की भी सुविधा है। हर मंजिल से पूरे शहर का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है। जैसा कि पहले से तय था, वर्ष 1909 में इसे नष्ट करने के बारे में सोचा गया, लेकिन तब तक यह जनता और सरकार, सब के दिलों में घर कर चुका था, इसलिए इसे एक बड़े रेडियो एंटीना की तरह प्रयोग करने का निश्चय किया गया। आज यह टॉवर पेरिस की पहचान और शान है।दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जब हिटलर पेरिस में घुसा तो लोगों ने एफिल टॉवर की लिफ्ट के केबल काट दिए, ताकि हिटलर उन के शहर की इस शान पर चढ़ न सके। हिटलर कुछ सीढि़यां चढ़ा, लेकिन फिर हार मान कर लौट गया। आज यहां पूरे संसार से हर साल 60-70 लाख लोग आते हैं। रात के समय जब पूरे टॉवर पर लगी 20 हजार लाइटें जगमगाने लगती हैं तब तो इस की शोभा देखते ही बनती है। इस से जुड़ा एक मजेदार तथ्य है कि मैटल से बना होने के कारण इस की लंबाई सूर्य की गरमी से प्रभावित होती है और मौसम के अनुसार 15 सैंटीमीटर तक घटती बढ़ती रहती है।
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