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Diwali 2018: दिवाली के कर्इ शुभ संयोग, इस मुहूर्त में करें पूजा, होगा लाभ


दीपों का त्योहार यानी दिवाली इस साल 7 नवंबर 2018 को मनाया जाएगा। शास्त्राें के मुताबिक कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के दिन संध्या काल में स्थिर लग्न में दिवाली पूजन करना चाहिए। इस साल अमावस्या तिथि 6 नवंबर की रात 10 बजकर 27 मिनट पर लग रही लेकिन उदयातिथि चतुर्दशी होने के कारण 6 नवंबर को अमावस्या तिथि का मान्य नहीं होगा। गृहस्थों के लिए दिवाली सबसे अच्छा मुहूर्तसात नवंबर को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि होने के कारण पूरे दिन अमावस्या तिथि का मान्य होगा आैर इसी दिन दिवाली पूजन भी किया जाएगा। बता दें कि अमावस्या तिथि इस रात 9 बजकर 32 मिनट पर समाप्त हो रही है। एेसे में दिवाली इस समय से पहले ही करना शुभ रहेगा। पंचांग की गणना के मुताबिक 7 नवंबर की शाम 6 बजकर 30 मिनट से 8 बजकर 30 मिनट तक बृषभ लग्न होगा। शास्त्रों के मुताबिक गृहस्थों के लिए दिवाली पूजन के लिए यह सबसे अच्छा समय रहेगा। इस समय माता लक्ष्मी के साथ, गणेश, कुबेर आैर भगवान विष्णु एवं शिव के साथ माता काली एवं सरस्वती की पूजा से स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होगी। शुभ संयोगइस साल दिवाली पर चंद्रमा तुला राशि में होंगे, इस राशि में पहले से ही राशि के स्वामी शुक्र मौजूद हैं आैर इनके साथ सूर्य भी हैं। एेसे में तुला राशि में सूर्य, शुक्र आैर चंद्रमा का त्रिग्रही योग बन रहा है जो बहुत अच्छा संयोग बन रहा है। इनके अलावा आयुष्मान योग आैर सौभाग्य याेग भी दिवाली को आैर भी शुभ आैर लाभकारी बना रहे हैं। इसके साथ ही बता दें केि बुधवार को दिवाली होना कारोबार के लिए अच्छा संकेत है। शेयर बाजार में तेजी आएगी आैर आर्थिक क्षेत्र में प्रगति होगी। एेसे करें पूजादिवाली पर माता लक्ष्मी को प्रिय लगने वाले पुष्पों और वस्त्रों से माता का श्रृंगार करना चाहिए। माता को पुष्प में कमल और गुलाब प्रिय है। मिष्ठान भोजन और खीर पसंद है। केसर की मिठाई और हलवा प्रिय है। दीप के लिए गाय का घी आवश्यक है। अब स्थिर लग्न वृष या सिंह में ही दीपावली में लक्ष्मी पूजन करते हैं। शुभ मुहूर्त में माता लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाते हैं। इसके पहले स्मरण रहे की माता लक्ष्मी और गणेश जी को काठ के आसन पर लाल वस्त्र बिछाकर आसीन करते हैं। अब सुगन्धित धूप बत्ती जलाते हैं। माता को केसर की मिठाई या खीर जो भी व्यवस्था हो उसका भोग लगाते हैं। माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का जाप करें...ॐ हिरण्यवर्णान हरिणीं सुवर्ण रजत स्त्रजामचंद्रा हिरण्यमयी लक्ष्मी जातवेदो म आ वहः।।

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