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मजेदार लेकिन खतरनाक है चंद्रताल लेक ट्रैकिंग, चांद पर चलने जैसा होता है एहसास


फेस्टिवल्स के लांग हाॅलीडे में अगर आप घूमने का प्लान बना रहे हैं तो हम आज आपको एेसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जहां की यात्रा मजेदार होने के साथ-साथ थोड़ी खतरनाक भी है। जी हां हम बात कर रहे हैं चंद्रताल लेक की। ट्रैकिंग के दौरान यहां बर्फ से ढंके पहाड़, झील और नदियों के खूबसूरत नजारे यकीनन आपके ट्रिप को यादगार बनाने का काम करते हैं।चंद्रताल को मून लेक के नाम से भी जाना जाता है। हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले में कुंजुम पास से 6 किमी की दूरी पर है चंद्रताल लेक। चंद्रताल ट्रैक करते हुए आपको ऐसा एहसास होगा जैसे आप सच में चांद के सफर पर निकले हैं। आसपास दो बड़े-बड़े मोउलकिला और चंद्रभाग पहाड़ हैं जिसकी ट्रैकिंग बहुत ही खतरनाक होती है। चंद्रताल लेक इंडिया के पवित्र झीलों में से एक है। झील के पानी को दिन में कई बार रंग बदलते हुए देखा जा सकता है।चंद्रताल लेक ट्रैक की शुरूआत मनाली से होती है, जो 3100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चिका से होते हुए थान (2900 मीटर) और फिर बालू के घेरे पर जाकर खत्म होती है। ‘बालू का घेरा’ पहुंचने में लगभग 5 घंटे का समय लगता है। रास्ते में फूल, पक्षी और कल-कल आवाज करते हुए बहती हुई नदियां मन को मोहने में कोई कसर बाकी नहीं रखतीं।कब आएंचंद्रताल लेक और हैम्पटा पास जाने के लिए जून से लेकर अक्टूबर तक का महीना परफेक्ट होता है। जैसे-जैसे सर्दियां बढ़ती है तापमान में गिरावट के साथ रास्ते भी बर्फ से ढ़क जाते हैं जिसमें ट्रैकिंग करना और ज्यादा मुश्किल हो जाता है।दिल्ली से बस द्वारा आप मनाली पहुंच सकते हैं। बस डिपो से हर घंटे बसें चलती हैं। हिमाचल सड़क परिवहन निगम भी दिल्ली में हिमाचल भवन से रोजाना मनाली के लिए वॉल्वो बसें चलाता है। मनाली से 50 किमी की दूरी पर जोगिंदर रेलवे स्टेशन है। यहां से भुंटर एयरपोर्ट भी 50 किमी दूर है।

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