OMG! इस छिपकली से होता है मर्दो का इलाज, कीमत जानकर चौंक मत जाना आप!

टोके गेको नाम की ये छिपकली बेहद खास है इसकी अंतर्राष्ट्रीय मार्किट में काफी मांग है और यहीं कारण है की इस प्रजाति की तस्करी की जाती है, यह छिपकली की एक दुर्लभ और लुप्त प्रजाति है जिसे पकड़कर बाहर के देशों में बेच दिया जाता है।बता दें कि इस छिपकली का यूज मर्दानगी बढ़ाने वाली दवा बनाने में किया जाता है। इसके मीट से डायबिटीज, नपुंसकता, एड्स और कैंसर की मेडिसिन्स बनाई जाती हैं। यह छिपकली की प्रजाति पूर्वोत्तर राज्यों के जंगलों में पायी जाती है,वन्यजीव मामलों के जानकारों का कहना है कि उत्तर पूर्वी भारत के मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड और असम में छिपकलियों के तस्करों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।टोके गेको छिपकली की उत्तर-पूर्वी भारतीय राज्यों से दक्षिणपूर्व एशियाई देशों में अवैध तस्करी की जाती है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में इसकी बेहद मांग है। यहां के लोगों का मानना है कि गेको मांस से बनी दवाईयां कई बीमारियों का इलाज कर सकती है। इंडोनेशिया, बांग्लादेश, पूर्वोत्तर भारत, फिलीपींस तथा नेपाल में पाई जाने वाली इस छिपकली की कीमत एक करोड़ रुपए तक बताई जाती है।म्यांमार में रहने वाले व्यापारी इन छिपकलियों को चीन, इंडोनेशिया, फिलीपीन्स और दूसरे दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों को बेचते हैं।छिपकलियों की अधिक मांग का मुख्य कारण लोगों का अंधविश्वास है इस कारण ही लोग छिपकली पकड़ते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार टोके गेको की विदेशों में काफी डिमांड है। एक किलो टोके के मांस से बनी दवाई की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 10 हजार यूरो तक हो सकती है। जिसके कारण लोग इन्हे पकड़कर मार देते हैं और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बेचकर मुनाफा कमाते हैं लेकिन इस वजह से यह छिपकली की प्रजाति लगभग लुप्त होने की कगार पर आ गयी है।
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