Gurugram के आर्किटेक्ट बनाएंगे सिक्किम में अष्ट चिरंजीवी धाम, ये है खासियत

धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सिक्किम सरकार लगातार प्रयासरत है। सिक्किम में पर्यटन को ध्यान में रखते हुए अष्ट चिरंजीवी धाम बनवाया जा रहा है। इस अष्ट चिरंजीवी धाम का शिलान्यास 20 फरवरी को सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग ने किया। इन अष्ट चिरंजीवियों का मंदिर दक्षिणी सिक्किम के नामथंग में बनाया जा रहा है। बता दें कि ये विश्व का पहला एेसा मंदिर होगा जिसमें एक साथ आठों चिरंजीव एक साथ होंगे। इस मंदिर के आर्किटेक्ट गुरुग्राम के रिपेंश शर्मा और हेमंत खन्ना हैं। रिपेंश शर्मा और हेमंत खन्ना सिक्किम में बन रहे परशुधाम धाम भी बना रहे हैं। कौन हैं अष्ट चिरंजीवी? हिंदू धर्म की मान्यताओं में आठ चिरंजीवी माने गए हैं। जिनके बारे में एेसा माना जाता है कि इन आठों चिरंजीवी ने युगों पहले जन्म लिया था आैर आज भी इस धरती पर मौजूद है। ये आठ चिरंजीवी-मार्कण्डेय, बाली, हनुमान, कृपाचार्य, परशुराम, विभीषण, व्यास और अश्वत्थामा। पुराणों में वर्णित इन अष्ट चिरंजीवियों में से दो कृपाचार्य और अश्वत्थामा का संबंध गुरुग्राम या यूं कह लें हरियाणा की धरती से रहा है। कौरवों के गुरु कृपाचार्य की बहन कृपी गुरु द्रोणाचार्य की पत्नी बताई गई हैं। अश्वत्थामा गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र थे।100 करोड़ की लागत से बनेगा धामसिक्किम में बन रहे इस धाम में 100 करोड़ रुपये की लागत लगेगी। यह मंदिर विश्व के धार्मिक पर्यटन को ध्यान में रखते हुए बनाया जा रहा है। मूर्तिकार नरेश ने बताया कि सिक्किम में बन रहे परशुधाम धाम के बाद यह उनका यहां का दूसरा प्रोजेक्ट है। मूर्तियों की डमी बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। आर्किटेक्ट रिपेंश शर्मा ने बताया कि इस मंदिर में हनुमान जी की कांस्य प्रतिमा 54 फुट की होगी जबकि अन्य चिरंजीवियों मार्कण्डेय, बाली, कृपाचार्य, परशुराम, विभीषण, व्यास और अश्वत्थामा की प्रतिमा 16 फुट की होगी। हिमालय और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच इस धाम में ध्यान केंद्र, लोगों के ठहरने की जगह, हवन कुंड भी बनाया जा रहा है। हमें इसे तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इसमें हनुमान मंदिर का कैंपस सबसे बड़ा होगा। यहां प्रदर्शनी कक्ष भी होगा, जिसे इको फ्रेंडली बनाया जाएगा। देश-विदेश में किया है मूर्तियों का निर्माणगौरतलब है कि रिपेंश शर्मा और हेमंत खन्ना की जोड़ी ने देश और विदेश के अन्य कई प्रमुख मंदिरों का निर्माण कराया है। वृंदावन स्थित 210 मीटर ऊंचे चंद्रोदय मंदिर का वास्तु भी इसी जोड़ी ने तैयार किया है। इसके लिए उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रशंसा पत्र भी भेजा था। इस आर्किटेक्ट जोड़ी ने अमृतसर स्थित दुर्गियाना मंदिर का पुनरोद्धार किया है। मॉरिशस और श्रीलंका के मंदिरों के निर्माण में भी अपना योगदान दिया है। कुरुक्षेत्र में गीताधाम बना रहे हैं। गुरुग्राम के गीता भवन मंदिर, शीतला माता मंदिर के पुननिर्माण की जिम्मेदारी भी इस आर्किटेक्ट जोड़ी ने ली है। इसके साथ ही सिक्किम में बन रहे परशुराम धाम की जिम्मेदारी भी इसी जोड़ी पर है।
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