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Ganesh Chaturthi 2018: इस गणेश चतुर्थी पर कीजिए अष्टसिद्धि के दर्शन, पूरी होगी हर मनोकामना


सनातन परंपरा में प्रथम पूजनीय भगवान गणेश को रिद्धि-सिद्धि और बुद्धि का देवता माना जाता है। गणपति की साधना अराधना के लिए देश-दुनिया में तमाम मंदिर हैं लेकिन महाराष्ट्र की संस्कृति में गणपति का विशेष स्थान है। यही कारण है कि गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक मनाया जाने वाला गणपति महोत्सव महाराष्ट्र के सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। गणपति उत्सव के दौरान महाराष्ट्र का कोना-कोना भगवान श्री गणेश की भक्ति में सराबोर रहता है। महाराष्ट्र के विभिन्न गणेश मंदिरों में अष्टविनायक का विशेष स्थान है। यह आठ अति प्राचीन मंदिर भगवान गणेश के आठ शक्तिपीठ भी कहलाते हैं। इन मंदिरों में गणपति की 8 स्वयंभू प्रतिमाएं विराजित हैं। इन पवित्र प्रतिमाओं के प्राप्त होने के क्रम के अनुसार ही अष्टविनायक की यात्रा भी की जाती है।जिसमें श्री मयूरेश्वर, मोरगांव, श्री सिद्धिविनायक, सिद्धटेक, श्री बल्लालेश्वर, पाली, श्री वरद विनायक, महाड, श्री चिंतामणि, थेऊर, श्री गिरिजात्मज, लेण्याद्री, श्री विघ्नेश्वर, ओजार और श्री महागणपति, रांजनगाव हैं।

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