बंदूक के ट्रिगर के साथ कैमरे के शटर पर भी कमाल चलती हैं इन जवानों की उंगलियां

देश की रक्षा को हर पल तत्पर रहने वाले जवान न सिर्फ दुर्गम क्षेत्रों में रहकर देश की सीमा की रक्षा कर रहे हैं बल्कि वहां से उन्होंने कुछ ऐसी तस्वीरें भी शेयर की है जिन्हे देखकर ये कहना मुश्किल है की ये किसी जवान का काम है प्रोफेशनल कैमरा मैन का. किसी प्रोफेशनल फोटोग्राफर ने नहीं भारत-चीन सीमा पर तैनात आईटीबीपी के जवानों ने खींची हैं। लद्दाख के कराकोरम से अरुणाचल प्रदेश के जाछेप ला तक तैनात इन जवानों की मुस्तैदी माइनस 40 डिग्री में भी कम नहीं होती। अगर युद्ध ना हो तो यहां इनकी सबसे बड़ी दुश्मन होती है बोरियत।इससे बचने के लिए और सुदूर, अनछ़ुए स्थानों जहां आम इंसान का जाना मुश्किल है उन स्थानों के बारे में दुनिया को बताने के लिए इन्होंने नया मंत्र सीख लिया है। यह है शूट एट साइट। नहीं नहीं शूट से हमारा मतलब गोलबारी नहीं बल्कि कैमरे पर अपनी क़ाबलियत दिखाने से था. ये जवान सामने दुश्मन हो या सुंदर नजारा। ये बिना मौका गंवाए शूट कर देते हैं। दुश्मन ढेर हो जाता है, नजारा कैमरे में कैद। बीते 2 साल से इनका हुनर ट्विटर से हर दिन दुनिया के सामने आ रहा है।आईटीबीपी प्रवक्ता विवेक कुमार पांडेय बताते हैं कि जवानों को एसएलआर व वीडियो कैमरे से फोटोग्राफी की ट्रेनिंग दी जाती है।42 दिनों की यह ट्रेनिंग 250 से ज्यादा जवान ले चुके हैं।आईटीबीपी की फोटो सेल फोटोग्राफ के बैंक की देखरेख करती है।आईटीबीपी प्रवक्ता विवेक कुमार पांडेय बताते हैं कि जवानों को एसएलआर व वीडियो कैमरे से फोटोग्राफी की ट्रेनिंग दी जाती है। ये जवान ऐसे हालात में ड्यूटी करते हैं, जहां ऑक्सीजन भी कम पड़ जाए। शारीरिक, मानसिक तौर पर फिट रहने के लिए फोटोग्राफी ऑक्सीजन का काम करती है।कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल की लोकेशन चुनौतियां पेश करती हैं। लेकिन जवानों के लिए तो ये फोटोग्राफी के 5 फ्रेम हैं। हर बार कुछ नया व अलग। आपको बता दें कि 250 से ज्यादा जवानों को कैमरे से जुडी ट्रेनिंग दी जा चुकी है56 बटालियन में हैं कुल 90 हजार जवान जो 3488 किमी सीमा की रक्षा करते हैं जिनकी 9-18 हजार फीट तक की ऊंचाई पर होती है तैनाती जहां से वो देश की सीमा की सुरक्षा करते हैं
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