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अनछुआ एहसास देती है जीरो वैली, नजारें देखकर होश उड़ जाएगें


अरुणाचल प्रदेश की खूबसूरत जीरो वैली की सिफारिश वर्ष 2012 में भारतीय पुरातत्व विभाग ने विश्व धरोहर स्थल के रूप में नामित किए जाने के लिए की थी। घाटी के मुख्य कस्बे को हापोली अथवा स्थानीय भाषा में हाओ पोलीयांग के नाम से पुकारा जाता है। इस घाटी में सैर तथा देखने के लिए बहुत कुछ है। इनमें से ही एक स्थान है जीरो पुतु। इसे आर्मी पुतु भी कहते हैं। यहां चारों ओर हरियाली है जो महानगरों के शोरगुल से दूर शांत व कुदरत के बेहद करीब स्थित है।यहां पर एक सुंदर फार्म में अनूठे ढंग से बांस पैदा किए जाते हैं। यहां वन स्टैम बैम्बू के साथ ब्ल्यू क्लैड पाइन (चीड़ के पेड़ों की एक नस्ल) उगाए जाते हैं। हाइकर्स व पर्यटकों में बांस का यह बाग खासा मशहूर है। जीरो वैली की नैसर्गिक सुंदरता कई फिल्म निर्माताओं को भी खूब आकर्षित करती रही है। यहां तारिन फिश फार्म भी देखने लायक है जहां इतनी ऊंचाई पर मछली पालन किया जाता है।इसके अलावा यह क्षेत्र अपने वन्यजीव उद्यानों के लिए भी मशहूर है। ताले घाटी ऐसा ही एक उद्यान है जहां जैव विविधता हर किसी का मन मोह लेती है। यह जीरो घाटी से 32 किलोमीटर उत्तर-पूर्व की ओर है। कब जाएंघाटी की सैर का सबसे अच्छा वक्त मार्च के मध्य से जुलाई के मध्य तथा अक्तूबर से दिसम्बर है जब तापमान 10 से 15 डिग्री रहता है। जनवरी-फरवरी में बर्फबारी और जुलाई से सितम्बर के दौरान खूब बारिश होती है।कैसे पहुंचेंअसम के कामरूप जिले में गुवाहाटी इसका सबसे करीबी हवाई अड्डा तथा बड़ा रेलवे स्टेशन है। यह यहां से करीब 12 घंटे दूर है। यहां से बस या टैक्सी से जीरो घाटी पहुंच सकते हैं।

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