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आैरंगाबाद की अजंता-एलोरा ही नहीं बेहिसाब खूबसूरती समेटे हुए है दौलताबाद किला, जरूर करें सैर


वैसे तो औरंगाबाद खासतौर से अपने अजंता और ऐलोरा गुफाओं के लिए जाना जाता है लेकिन ऐतिहासिक दृष्टि से भी ये जगह बहुत ही खास है। क्योंकि यहां है चट्टानों को काटकर बनाया गया अद्भुत दौलताबाद किला। जो उस वक्त के उत्तम वास्तुकला का नायाब नूमना है। ये भारत के सबसे विशाल और मजबूत किलों में से भी एक है। किले के अंदर और भी कई दूसरे स्मारक जैसे भारत माता मंदिर, चंद मीनार, जलाशय, चीनी महल, हाथी टैंक, बाजार, बने हुए हैं।दौलताबाद किला 200 मीटर ऊंचे शंकुकार पहाड़ी पर बना है। इतनी ऊंचाई पर बने होने की वजह से ही दुश्मन सेना का यहां तक पहुंच पाना मुश्किल होता था। इस किले की दूसरी खासियत है कि ये जिस पहाड़ी पर बना है उसके चारों ओर गई खाईयां हैं। 95 हेक्टेयर एरिया में फैले इस किले की सुरक्षा के लिए 3 ऊंची दीवारें हैं, जिन्हें कोट कहते हैं। मुख्य किले तक पहुंचने के लिए तीन अभेद दीवारों, एक जलशय, अंधेरे और टेढ़े मेढ़े मार्ग से लगभग 400 सीढ़ियों से होकर गुजरना पड़ता है।भीलम नामक राजा ने 11वीं सदी में इस किले की खोज की थी। तब इस शहर को देवगिरि के नाम से जाना जाता था। काफी समय बाद मुहम्मद बिन तुगलक ने दौलताबाद का इस्तेमाल अपने राज्य का विस्तार करने में किया। कैसे पहुंचेऔरंगाबाद यहां का सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट है। जहां तक के लिए सभी बड़े शहरों से रोजाना फ्लाइट्स अवेलेबल हैं। औरंगाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचकर यहां तक पहुंचना आसान है। औरंगाबाद से दौलताबाद की दूरी 16 किमी है। जहां तक के लिए रिक्शा और टैक्सी की सुविधा अवेलेबल है।

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