वास्तुकला और शिल्पकला का अदभुत संगम है तिरुपति बालाजी मंदिर

भगवान विष्णु का प्रसिद्ध तिरुपति वेंकटेश्वर मन्दिर आन्ध्र प्रदेश के चित्तूर ज़िले के तिरुपति में स्थित है। इस मंदिर को तिरुपति बालाजी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। तिरुमला के सात पर्वतों में से एक वेंकटाद्रि पर बना श्री वेंकटेश्वर मन्दिर यहां का सबसे बड़ा आकर्षण का केन्द्र है। इसलिए इसे सात पर्वतों का मन्दिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मन्दिर में प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में भक्तजन दर्शनों के लिए आते हैं। कई शताब्दी पूर्व बने इस मन्दिर की सबसे ख़ास बात इसकी दक्षिण भारतीय वास्तुकला और शिल्पकला का अदभुत संगम है। चूंकि, तिरुपति भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है, इसलिए यहां स्थित वेंकटेश्वर मन्दिर को दुनिया में सबसे अधिक पूजनीय स्थल कहा गया है।पौराणिक आख्यानों के अनुसार, इस मन्दिर में स्थापित भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति में ही भगवान बसते हैं और वे यहां समूचे कलियुग में विराजमान रहेंगे। वैष्णव परम्पराओं के अनुसार यह मन्दिर 108 दिव्य देसमों का एक अंग है। कहा जाता है कि चोल, होयसल और विजयनगर के राजाओं का आर्थिक रूप से इस मन्दिर के निर्माण में ख़ास योगदान रहा है। यहां पर बिना किसी भेदभाव व रोकटोक के किसी भी जाति व धर्म के लोग आ-जा सकते हैं, क्योंकि इस मन्दिर का पट सभी धर्मानुयायियों के लिए खुला है। मन्दिर परिसर में ख़ूबसूरती से बनाए गए अनेक द्वार, मंडपम और छोटे मन्दिर हैं, जिसका आप दर्शन कर सकते हैं। कैसे जाएंयहां से निकटतम हवाई अड्डा तिरुपति है। इंडियन एयरलाइंस की हैदराबाद, दिल्ली और तिरुपति के बीच प्रतिदिन सीधी उडा़न उपलब्ध है। इसके अलावा आप बस से भी यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। वहीं यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन तिरुपति है। यहां के देश के विभिन्न हिस्सों से रोजान ट्रेनें हैं। मौसम के हिसाब से यहां आने का उपयुक्त समय सितंबर से फरवरी के बीच है। कहां ठहरेंतिरुपति में ठहरने के लिए कई शानदार होटल हैं। जहां आप तिरुपति बालाजी के दर्शन के बाद आराम कर सकते हैं। इन होटलों में केवीपी इन, सिंदूरी पार्क, फॉर्च्यून सिलेक्ट ग्रैंड रिज, सुप्रभात टॉवर इत्यादि शामिल हैं।
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