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शिविंदर सिंह बड़े भार्इ मालविंदर सिंह के खिलाफ पहुंचे कोर्ट, बर्बाद करने का लगाया आरोप

नर्इ दिल्ली। रैनबैक्सी लैबाेरेटरीज के पूर्व प्रोमोटर आैर अब फोर्टिस हाॅस्पिटल्स के संस्थापक शिविंदर सिंह ने बड़े भार्इ मालविंदर सिंह के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इसके साथ ही शिविंदर सिंह ने रेलिगेयर एंटरप्राइज के पूर्व कार्यकारी अधिकारी व प्रबंध निदेशक सुनील गोधवानी के खिलाफ भी केस किया है। उन्होंने इन दोनों पर उनके पारिवारिक बिजनेस को नुकसान पहुचाने आैर गलत प्रबंधन का आरोप लगाया है। दरअसल, दोनों भार्इयों के बीच ये झगड़ा तब शुरु हुआ जब रैनबैक्सी लैबाेरेटरीज को जापानी कंपनी दाइची सांक्यो के हाथों बेचा दिया गया।


दोनों पर लगाए ये गंभीर आरोप
रैनबैक्सी लैबोरेटरीज को करीब 10 साल पहले 4.6 अरब डाॅलर में बेचा गया था। मंगलवार को शिविंदर सिंह ने अपने बड़े भार्इ मालविंदर सिंह के खिलाफ नेशनल कंपनी लाॅ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में केस दर्ज कराया है। अपने याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि, 'मालविंदर सिंह आैर सुनील गोधवानी ने कंपनियों के हितों का लगातार नजरअंदाज किया।' शिविंदर सिंह ने सुनील गोधावनी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने करीब एक दशक तक गुप्त रूप से लेनदेन किया आैर साल 2016 में कर्ज के बड़े बोझ के साथ कंपनी को छोड़ दिया। इन कंपनियों में आरएचसी, होल्डिंग्स, रेलिगेयर आैर फोर्टिस हेल्थेकयर शामिल है।


मालविंदर सिंह ने दिया जवाब
बताते चलें कि पहले ही इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि फोर्टिस ब्रदर्स के बीच मतभेद चल रहे हैं। फिलहाल फोर्टिस हेल्थेकेयर के पूर्व एग्जिक्युटिव वाइस चेयरेमैन शिविंदर सिंह है। उनका कहना है कि जिस वक्त फोर्टिस ने प्रोमोटर्स से संबंधित तीन कंपनियों को अनसेक्योर्ड लोन दिए थे, उस वक्त वह किसी अथाॅरिटी पोजीशन में नहीं थे। वहीं दूसरी तरफ मालविंदर सिंह ने अपने जवाब में कहा है कि कंपनी से जुड़े सभी फैसले सामूहिक रूप से लिए गए थे। मालविंदर सिंह ने इसी साल फरवारी माह में फोर्टिस के पूर्व एग्जिक्युटिव वाइस चेयरमैन के पद से इस्तीफा दिया था।

 



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