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हर की पौड़ी में सिर्फ स्नान करने से होती है मोक्ष की प्राप्ति, आते हैं लाखों भक्त


हर की पौड़ी अथवा हरि की पौड़ी भारत के उत्तराखण्ड राज्य में हिन्दुओं की पवित्र धार्मिक नगरी हरिद्वार के सर्वाधिक पवित्र स्थलों में से एक है। यह वह स्थान है, जहां प्रतिदिन लघु भारत के दर्शन होते हैं। हर की पौड़ी को ब्रह्मकुण्ड के नाम से भी जाना जाता है। ये माना गया है कि यही वह स्थान है, जहां से गंगा नदी पहाड़ों को छोड़कर मैदानी क्षेत्रों की ओर मुड़ती है।हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के बाद देवशिल्पी विश्वकर्मा अमृत के कलश को, जिसे पाने के लिए देवता तथा दानव झगड़ रहे थे, बचाकर ले जा रहे थे। तब पृथ्वी पर अमृत की कुछ बूंदें कलश से छलक कर गिर गईं और वे स्थान धार्मिक महत्त्व वाले स्थान बन गए। अमृत की बूंदे हरिद्वार में भी गिरीं और जहां पर वे गिरी थीं, वह स्थान हर की पौड़ी था। यह माना जाता है कि यहां पर स्नान से मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रत्येक 12 वर्ष के पश्चात् यहां कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से लाखों भक्त यहां आते हैं। हर की पौड़ी का निर्माण प्रसिद्ध राजा विक्रमादित्य द्वारा करवाया गया था।गंगा आरतीशाम के वक़्त यहां महाआरती आयोजित की जाती है। गंगा नदी में बहते असंख्य सुनहरे दीपों की आभा यहां बेहद आकर्षक लगती है। हरिद्वार की सबसे अनोखी चीज़ है, शाम को होने वाली गंगा की आरती। हर शाम हज़ारों दीपकों के साथ गंगा की आरती की जाती है। जल में दिखाई देती दीयों की रोशनी हज़ारों टिमटिमाते तारों की तरह लगती है। इसके अलावा हरिद्वार में बहुत सारे मंदिर और आश्रम हैं। जिसे आप देख सकते हैं। कैसे जाएंहरिद्वार के लिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, पटना, वाराणसी देहरादून, मथुरा, आगरा, नैनीताल आदि अनेक स्थानों से रेलगाड़ी द्वारा जाया जा सकता है। इन शहरों से सड़क मार्ग द्वारा भी जाया जा सकता है।कहां ठहरेंयहां ठहरने के लिए कई शानदार होटल हैं जहां आप रुक सकते हैं। जिसमें हवेली हरि गंगा, त्रिशुल, होटल ग्रैड शिवा, होटल आनंद, रेडिएंट होटल, हिमालया जैसे कई होटल शामिल हैं। इनका किराया 500 रुपए से शुरू होता है।

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