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एनआरसी संयोजक पद से हटाएं हाजेला को :देवब्रत


विधानसभामें विपक्ष के नेता देवब्रत सइकिया ने एनआरसी के संयोजक प्रतीक हाजेला परसर्वोच्च न्यायालय को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की है। मालूम हो कि राज्य सरकार ने बीते 30 जुलाई को एनआरसी का दूसरा और अंतिम मसौदा जारी किया था। अंतिम मसौदे में कुल 3,29,91,384 आवेदकों में से 2,89,83,677 व्यक्ति एनआरसी के वैध पाए गए। अंतिम ड्राफ्ट एनआरसी में 4,007,677 लोगों के नाम शामिल नहीं थे।इनमें से 37,59,630 नाम खारिज कर दिए गए हैं और शेष 2,48,077 के नाम दस्तावेजों के सत्यापन न होने कीवजह से शामिल नहीं कि जाने की बात कही गई। नेता प्रतिपक्ष सइकिया ने बताया कि सरकार सहित विभिन्न हितधारकों द्वारा एनआरसी के लिए तैयार पात्रता मानदंडों ने विशेष रुप से 1951 एनआरसी और 1971 के पूर्व की मतदाता सूची को सत्यापन के उद्देश्य के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सूचा में प्रथम दो के रुप में सूचीबद्ध किया था और इन दो दस्तावेजों का उल्लेख 2003 के नियमों के प्रासंगिक भाग में हैं। उन्होंने कहा कि हाजेला ने मनमाने ढंग से इन दस्तावेजों को भी जांच प्रकिया से जोड़ने का सुझाव दिया था। सइकिया ने कहा कि कई लोगों ने यह अनुमान नहीं लगाया था कि एक दिन एेसा आएगा जब 1951 एनआरसी और पूर्व -1971 की मतदाता सूची में उनके माता-पिता, दादा -दादी के नामों की उपस्थिति उनकी नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं होगी। एेसे लोग हाजेला द्वारा स्वीकार्य नागरिकता दस्तावेजों के रुप में सुझाए गए दस दस्तावेजों में से किसी एक को हासिल करने के लिए शायद परेशान नहीं थे। अगर हाजेला के प्रस्ताव को स्वीकार किया जाता है तो इन लोगों को वास्तविक नागरिक होने के बावजूद विदेशी करार दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एनआरसी अद्दतन प्रक्रिया की प्रगति की एेसी स्थिति में योग्यता मानदंडो को बदलने की पहल न्योता विरुद्ध होगा।

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