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मलेशिया में समलैंगिक को कानूनी दर्जा देने की मांग, लेस्बियन को सजा देने के खिलाफ प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद

कुआलालांपुर: भारत में दो व्यस्क लोगों के बीच समलैंगिक संबंध अब बेशक अपराध नही है लेकिन मलेशिया में इसे अपराध माना गया है। अभी हाल में ही यहां की शरिया अदालत ने एक महिला समलैंगिक को बेंत मारने की सजा सुनाई है। हालांकि सामाजिक संगठनों की तरफ से इसकी निंदा की जा रही है। अब यहां भी समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी में नहीं रखने की मांग उठ रही है। मलेशिया के प्रधानमंत्री को भी सजा पायी महिला समलैंगिकों से हमदर्दी है। प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद ने गुरुवार को इस्लामिक अदालत द्वारा दो समलैंगिंक महिलाओं को बेंत से पीटने की सजा सुनाए जाने की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि कोर्ट को दया दिखानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि उनकी पहली गलती के बावजूद महिलाओं को समझाया जाना चाहिए था, ना कि सजा देनी चाहिए थी।

समलैंगिंक संबंध बनाते पकड़ी गई थीं महिलाएं

इस्लामी पुलिस ने देश के सर्वाधिक रूढ़िवादी हिस्से में से एक तेरेंगनु में इस साल अप्रैल में सार्वजनिक स्थल पर पार्क की गई कार में दो महिलाओं को समलैंगिंक संबंध बनाते पकड़ा था। इस्लामी अदालत ने शरिया या इस्लामिक कानून के तहत महिलाओं को छह बेंत मारने की सजा सुनाई, जो कि समलैंगिंक सेक्स करने पर मुकर्रर है। मानवाधिकार समूहों ने इस सजा को क्रूर और अन्याय करार देते हुए इसे मलेशिया में एलजीबीटी समुदाय के अधिकारों का हनन बताया है और कहा है कि देश में असहिष्णुता बढ़ रही है। मलेशिया में ड्युअल न्याय प्रणाली है, इसके तहत इस्लामिक अदालत मुस्लिम आबादी के धार्मिक और पारिवारिक मामलों को सुलझाता है, जिसमें गैरशादीशुदा जोड़ों के बीच यौन संबंध के मामले भी शामिल हैं। बता दें कि पिछले महीने इन दोनों महिलाओं को शरिया कानून तोड़ने के आरोप में सजा सुनाई गई थी। दोनों महिलाओं पर 800 डॉलर का हर्जाना भी लगाया था। अगर ये महिलाएं जुर्मना अदा नहीं किया तो उन्हें चार महीने जेल में बिताने पड़ेंगे।



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