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बाप रे बाप, इस खतरनाक खेल में विजेता का अंजाम होता है सिर्फ सफ़ेद कपडा, जानिए पूरी कहानी


खेल तो आप सबने खूब खेला होगा लेकिन एक ऐसा खेल भी है जिसको जितने के बाद खिलाडी को हासिल होता है सिर्फ सफ़ेद कपडा जी हां सुनकर चौक गए ना आप भी लेकिन ये सच है इस खतरनाक खेल का अंजाम होता है सफ़ेद कपडा जो खिलाडी को उसकी जित के बाद मिलता हैउत्तर-पूर्व भारत के मणिपुर राज्य ने इस देश को कई धुरंधर खिलाड़ी दिए हैं फिर चाहे वो मैरी कॉम हों, सरिता देवी हों या फिर डिंग्को सिंह हों लेकिन आज जिस खेल की बात हम कर रहे हैं वो है पारम्परिक खेल यूबी लाक्पीमणिपुर में ये खेल सदियों से खेला जा रहा है. यूबी लाक्पी का मतलब होता है कोकोनट स्नैचिंग. ये खेल यहां कई दशकों से खेला जा रहा है. यहां के लोगों का मानना है कि मॉर्डन रग्बी न सिर्फ इस खेल से प्रेरित है बल्कि यूबी लाक्पी को रग्बी से ज्यादा मुश्किल खेल भी माना जाता है. जहां 400 ग्राम की रग्बी बॉल में हवा भरी होती है, वहीं मणिपुर के यूबी लाक्पी खेल में 1 किलो के खाली नारियल इस्तेमाल होता है. इस खेल में सबसे कमाल की बात ये है कि इस मैदान में गोल सिर्फ एक तरफ ही होता है. ये गोल 4.5 मीटर लम्बा और 3 मीटर चौड़ा एक आयताकार खाना होता है, जिसके पीछे गांव का मुखिया बैठा होता है. गोल करने के लिए खिलाड़ी को नारियल मुखिया तक पहुंचाना पड़ता है. यूबी लाक्पी के मैन ऑफ द मैच को मुखिया के हाथ से कोई ट्रॉफी नहीं बल्कि एक सफ़ेद कपड़ा दिया जाता हैइस खेल को शुरू करने से पहले इसे और कठिन बनाने के लिए नारियल में चारों ओर भरपूर मात्रा में तेल लगा दिया जाता है. जिससे नारियल और भी चिकना हो जाता है और खिलाड़ियों के पकड़ में आसानी से नहीं आता.दरअसल पुराने समय में इस खेल को करवाने का मकसद होता था सबसे ताकतवर योद्धा को ढूंढना. मगर अब न राजा हैं और न ही योद्धा. उसके बावजूद यह खेल अब भी चल रहा है. पुरानी परंपरा में बदलाव करते हुए अब इस खेल में योद्धा नहीं बल्कि मैन ऑफ द मैच ढूंढें जाते हैं. पुराने समय की बात करें तो इस खेल में पूरा गांव शामिल हुआ करता था, लेकिन आधुनिकता के दौर में इस परंपरा को कुछ गिने-चुने लोग ही निभा रहे हैं.लेकिन मणिपुर के इतिहास से जुड़ा ये खेल आज लुप्त होने की कगार पर है जिसके लिए सरकार के साथ साथ NGO को भी आगे आना चाहिए

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