हार के बाद इस राज्य में चुनाव भी नहीं करा पाई BJP

अरुणाचल प्रदेश में एक जून से कोई भी पंचायती राज संस्था नहीं होगी। इसकी वजह यह है कि राज्य सरकार इस निर्वाचित निकाय का मौजूदा कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनाव संपन्न करा पाने में नाकाम रही है। पंचायत राज विभाग के सचिव राज बिडोल ताएंग ने उपायुक्तों को लिखे पत्र में, इन निर्वाचित निकायों, जिनका 31 मई को कार्यकाल खत्म हो रहा है, का चुनाव नहीं कराने के सरकार के फैसले के लिए कुछ संवैधानिक अड़चनों को कारण बताया है।पत्र में कहा गया है कि सरकार ‘द अरुणाचल पंचायत राज (संशोधन) कानून, 2018’ के अनुरूप नए पंचायती राज नियम तैयार कर रही है, इस बीच सरकार द्वारा संक्रमण काल के लिए पंचायती राज संस्थाओं के कर्तव्यों के निष्पादन के लिए संस्थागत व्यवस्था की जा रही है। अधिसूचना की प्रति आपको जल्द आपको भेज दी जाएगी। कुछ हफ्ते पहले, मीडिया में राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त हागे कोजीन को उद्धृत करते हुए कहा गया था कि चुनाव कराने के लिए सरकार को 14 मई की तारीख काहार के बाद इस राज्य में चुनाव भी नहीं करा पाई BJP प्रस्ताव दिया गया है, लेकिन सरकार ने यह कहते हुए इस फैसले का विरोध किया कि चुनाव प्रक्रिया को संपन्न नहीं कराया जा सकता क्योंकि पंचायती राज संस्था में संशोधन करने के लिए विधेयक को विधानसभा द्वारा पारित किया जा चुका है।पंचायती राज का मकसद निर्वाचित सदस्यों वाली स्थानीय सरकार के माध्यम से शासन को उनके ज्यादा करीब लाना है। अरुणाचल प्रदेश में डेइंग इरिंग कमेटी की सिफारिशों पर अमल करते हुए पंचायत का पहला चुनाव 1969 में हुआ था। इस पहाड़ी राज्य में तब से नियमित रूप से चुनाव होते रहे हैं और संसद द्वारा 73वां संविधान संशोधन विधेयक, 1992 पारित किए जाने से तीन स्तरीय व्यवस्था किए जाने बाद यहां भी कानून में बदलाव किए गए।बता दें कि विधानसभा ने तीन स्तरीय पंचायती राज सिस्टम के मध्यवर्ती संस्थान अंचल समिति को हटाने के लिए 15 मार्च को एक विधेयक पारित किया। यह कदम संविधान के 73वें संशोधन के तहत उठाया गया था, जो 20 लाख से कम आबादी वाले राज्य को मध्यवर्ती स्तर को खत्म करने का अधिकार देता है। अरुणाचल प्रदेश की आबादी 13.8 लाख है। संशोधन के तहत ग्राम पंचायत और जिला परिषद की दो स्तरीय व्यवस्था की गई है।पंचायत मंत्री अलो लिबांग ने मीडिया को बताया कि वित्तीय कारणों से भी सरकार यह विधेयक लाने पर मजबूर हुई क्योंकि मध्यवर्ती स्तर को खत्म करने से 5 करोड़ रुपए बचेंगे जो विकास के कामों पर खर्च किए जा सकेंगे।उत्तर पूर्व के दूसरे राज्यों की तरह अरुणाचल प्रदेश को भी विशेष राज्य का दर्जा हासिल है, जिसके तहत यह केंद्र सरकार से विशेष वित्तीय पैकेज का हकदार है।
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