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बड़ा खुलासा, ममता सरकार ने नहीं भेजे 90 फीसदी लोगों के सत्यापित दस्तावेज


राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के अंतिम मसौदे पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री आरोप लगा रही है कि इसमें जानबूझकर बंगालियों को बाहर किया है लेकिन अब खुलासा हुआ है कि राज्य में एनआरसी अद्यतन के लिये उनकी सरकार 90 प्रतिशत लोगों के दस्तावेजों का सत्यापन उपलब्ध करवाने में असफल रही है। एनआरसी असम के राज्य समन्वयक प्रतीक हाजेला ने एक टीवी चैनल को दिये साक्षात्कार में यह खुलासा किया। हाजेला ने कहा कि एनआरसी को अद्यतन करने के लिये लगभग 1.50 लाख दस्तावेजों को पश्चिम बंगाल सत्यापन के लिये भेजा गया था, जिसके बाद करीब 15,000 सत्यापित दस्तावेजों पर ही प्रतिक्रिया प्राप्ति हुयी। पश्चिम बंगाल ने 1.35 लाख दस्तावेजों के सत्यापन नहीं भेजे। असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के अंतिम मसौदे को 30 जुलाई को जारी किया गया था, जिसमें 2.89 करोड़ से अधिक आवेदकों के नाम शामिल हैं और 40.07 लाख से ज्यादा लोगों के नाम छोड़ दिये गये हैं। ये नाम अन्य राज्यों से सत्यापन नहीं हो पाने की वजह से अंतिम मसौदे में शामिल होने से चूक गये। बनर्जी जबसे आरोप लगा रही हैं कि बंगालियों, बिहारियों और अन्य राज्यों से आने वाले लोगों को असम एनआरसी से बाहर निकाल कर एक एक चाल रही है और इससे असम में गृह युद्ध जैसे हालात बन रहे हैं। जिन लोगों के नाम इसमें नहीं हैं, वे 30 अगस्त से 28 सितंबर के बीच आवेदन कर सकते हैं, जिन लोगों के नाम छूट गये हैं वे सात अगस्त से एनआरसी सेवा केंद्रों और स्थानीय रजिस्ट्रार से नाम छूटने की वजह जान सकते हैं। असम के लिए एनआरसी को अद्यतन करने की प्रक्रिया 24 मार्च 1971 की मध्यरात्रि को अंतिम तारीख मानते हुए उच्चतम न्यायालय की देखरेख में 2013 में शुरू हुई थी, और इस पर आने वाला अनुमानित खर्च 1,220 करोड़ रुपये है। एनआरसी आवेदन पत्रों की प्राप्ति की प्रक्रिया मई 2015 के अंत में शुरू हुई और उसी वर्ष 31 अगस्त को समाप्त हो गयी। इकतीस दिसंबर, 2017 की मध्य रात्रि 1.90 करोड़ आवेदकों के नाम के साथ पहला मसौदा जारी किया गया।

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